श्रीमती शशि सराफ
(श्रीमती शशिसुरेश सराफ जी सागर विश्वविद्यालय से हिंदी एवं दर्शन शास्त्र से स्नातक हैं. आपने लायंस क्लब और स्वर्णकार समाज की अध्यक्षा पद का भी निर्वहन किया. आपका “लेबल शशि” नाम से बुटीक है और कई फैशन शोज में पुरस्कार प्राप्त किये हैं. आपका साहित्य और दर्शन से अत्यधिक लगाव है. आप प्रत्येक शुक्रवार श्रीमती शशि सराफ जी की रचनाएँ आत्मसात कर सेंगे. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता ‘नदिया की धार…‘।)
☆ शशि साहित्य # १६ ☆
कविता – नदिया की धार… ☆ श्रीमती शशि सुरेश सराफ
मस्त मगन वो बहती धार,
फूलों ने थमने, प्यार से लिया पुकार…
मदमाती वो हंसती रही,
मंद गति वो चलती रही…
खेत खलिहानों को,
वन और उपवनों को…
जीवनदान, जो लिया है ठान,
यही तो है उसके अस्तित्व का सार…
पूजनीय वह वंदिता,
महिमा उसकी अपरंपार…
रुकना उसके वश में नहीं,
मोह में पड़ना ,ठीक नहीं,
रुकी जलधार, होगा प्रकृति प्रहार…
थमना राह का रोड़ा है,
फिर समुद्र मिलन भी होना है…
तन्मय हो वो बह चली…
बन रसवंती धार….
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© श्रीमती शशि सराफ
जबलपुर, मध्यप्रदेश
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





