डॉ.राजेश ठाकुर
( प्रो डॉ राजेश ठाकुर जी का मंतव्य उनके ही शब्दों में – “पाखण्ड, अंध विश्वास, कुरीति, विद्रूपता, विसंगति, विडंबना, अराजकता, भ्रष्टाचार के खिलाफ़ जन-समुदाय को जागृत करना ही मेरी लेखनी का मूल प्रयोजन है…l” अब आप प्रत्येक शनिवार डॉ राजेश ठाकुर जी की रचनाएँ आत्मसात कर सकते हैं. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण रचना “तो जानें…“.)
साप्ताहिक स्तम्भ ☆ नेता चरित मानस # २५
कविता – सार… ☆ प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर
-1-
ये तथ्य हैं उनींदे, जगाओ झिंझोड़कर
रखा गया है जिनको, गर्दनें मरोड़ कर
-2-
ये तो मुँह तलक़ हैं, लबालब भरे हुए
ज़ोख़िम ले कौन ऐसे चिकने घड़े फोड़कर
-3-
भूमिका पढ़ी न, उपसंहार ही पढ़ा
रख दी क़िताब उसने, एक पृष्ठ मोड़कर
-4-
न दी ज़मीन जिसने, सुई की नोंक बराबर
एक दिन चला गया वो साम्राज्य छोड़कर
-5-
मांग सजाने की थी जो, मांग तुम्हारी
लाया हूँ आसमाँ से, चाँद-तारे तोड़कर
-6-
सरकार बना डाली, गुणा-भाग जोड़कर
खा रहे हैं माल आप, कथरी ओढ़कर
-7-
चिंतन की धूप बिन लगे, ज़ेहन में फफूँदी
‘राजेश’ ने लाया है, सार यह निचोड़कर
☆
© प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर
शासकीय कॉलेज़ केवलारी
संपर्क — ग्राम -धतूरा, पोस्ट – जामगाँव, तहसील -नैनपुर, जिला -मण्डला (म.प्र.) मोबा. 9424316071
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈




