श्री मनोज कुमार शुक्ल “मनोज”

संस्कारधानी के सुप्रसिद्ध एवं सजग अग्रज साहित्यकार श्री मनोज कुमार शुक्ल “मनोज” जी  के साप्ताहिक स्तम्भ  “मनोज साहित्य ” में आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता “हर कवि का कर्तव्य है…। आप प्रत्येक मंगलवार को आपकी भावप्रवण रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे।

✍ मनोज साहित्य # २१५ ☆

☆ हर कवि का कर्तव्य है… ☆ श्री मनोज कुमार शुक्ल “मनोज” ☆

हर कवि का कर्तव्य है, कुछ न लिखें अनर्थ।

कविता न बदनाम हो, गूढ़ छिपा है अर्थ।।

*

कविता का जो धर्म है, पहले समझें आप।

मानव का यह ताप हर, दूर करे संताप।।

*

कविता मानव की सखा, जानें उसका मर्म।

कलम सिपाही है वही, समझे अपना कर्म।।

*

वेदशास्त्र इसमें लिखे, पद्य-गद्य अनमोल।

भारत के साहित्य में, मानव हित के बोल।।

*

विसंगतियों का दौर यह,स्वार्थ भाव है आज।

नैतिक मूल्यों को जगा, बदलें सकल समाज।।

*

परिहासों-चुटकुलों से, क्षण भर का आनंद।

कविता में संदेश हो, दूर करें छल-छन्द।।

*

कवियों का यह फर्ज है, कविता का यह धर्म।

गलत दिशा में जो चलें , दिखा राह सत्कर्म।।

*

कीचड़ में खुद न फँसें, सबका रखें खयाल।

मानव हित की सोच से,जग को करें निहाल।।

*

दरबारी खुद ना बने, उससे करें बचाव।

परहित में जो है लगा, उसका करें चुनाव।।

*

हर कवि को है चाहिये, करें फर्ज निर्वाह।

न्याय विवेकी ही रहें , यही कलम की चाह।।

©  मनोज कुमार शुक्ल “मनोज”

संपर्क – 58 आशीष दीप, उत्तर मिलोनीगंज जबलपुर (मध्य प्रदेश)- 482002

मो  94258 62550

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

Please share your Post !

Shares
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments