आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’
(आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी संस्कारधानी जबलपुर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। आपको आपकी बुआ श्री महीयसी महादेवी वर्मा जी से साहित्यिक विधा विरासत में प्राप्त हुई है । आपके द्वारा रचित साहित्य में प्रमुख हैं पुस्तकें- कलम के देव, लोकतंत्र का मकबरा, मीत मेरे, भूकंप के साथ जीना सीखें, समय्जयी साहित्यकार भगवत प्रसाद मिश्रा ‘नियाज़’, काल है संक्रांति का, सड़क पर आदि। संपादन -८ पुस्तकें ६ पत्रिकाएँ अनेक संकलन। आप प्रत्येक सप्ताह रविवार को “साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह” के अंतर्गत आपकी रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे। आज प्रस्तुत है – सॉनेट – आशा ताई।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह # २७६ ☆
☆ सॉनेट – आशा ताई ☆ आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ ☆
(शेक्सपिअरी शैली)
☆
आशा ताई अभिनव आशा
गूँज वाक् में थी अनहद की।
०
स्वर-सरगम की नव अभिलाषा
सीमा थी असीम सरहद की।।
०
आत्मिक तेज व्याप्त गायन में
क्षण-क्षण सुने सिहर जाता था।
०
ब्रह्म नाद था उच्चारण में
कण-कण बँधा बिखर जाता था।।
०
धरा सुता हे भारत तनया!
सुर प्रेमी उर अगणित ध्याएँ।
०
गीत-ग़ज़ल सुन भाग्य सराहें
शब्द-शब्द में अमरित पाएँ।।
०
गईं धरा को तुम सूना कर।
दर्द लता दी का दूना कर।।
☆
© आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’
१९.११.२०२५
संपर्क: विश्ववाणी हिंदी संस्थान, ४०१ विजय अपार्टमेंट, नेपियर टाउन, जबलपुर ४८२००१,
चलभाष: ९४२५१८३२४४ ईमेल: salil.sanjiv@gmail.com
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






