श्री अरुण कुमार दुबे
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री अरुण कुमार दुबे जी, उप पुलिस अधीक्षक पद से मध्य प्रदेश पुलिस विभाग से सेवा निवृत्त हुए हैं । संक्षिप्त परिचय ->> शिक्षा – एम. एस .सी. प्राणी शास्त्र। साहित्य – काव्य विधा गीत, ग़ज़ल, छंद लेखन में विशेष अभिरुचि। आज प्रस्तुत है, आपकी एक भाव प्रवण रचना “मतलब की रेत पे रखी बुनियाद प्यार की…“)
☆ साहित्यिक स्तम्भ ☆ कविता # १४० ☆
मतलब की रेत पे रखी बुनियाद प्यार की… ☆ श्री अरुण कुमार दुबे ☆
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क्या क्या न कह गए दिले दिलगीर के लिए
कोई न भूल सकता कभी मीर के लिए
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गफ़लत न कीजियेगा कभी इस्तमाल में
अल्लाह ने न आँख दी शमशीर के लिए
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राहत जो मुफ़लिसी से दे वो दो दवा हमें
बहला रहा है रहनुमा अकसीर के लिए
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मतलब की रेत पे रखी बुनियाद प्यार की
पुख्ता मकाम चाहिए तामीर के लिए
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हिंदू व मुसलमां को चलो अब तो बख़्श दो
मौज़ू नए तलाशिये तक़रीर के लिए
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छाई है ज़हनो-दिल पे ज़िहालत की तीरगी
हम मुंतज़िर है ज़ीस्त में तनवीर के लिए
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जेहाद औ तलाक हलाला का सच है क्या
बेताब हूँ में जानने तफ़्सीर के लिए
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ख़ातून को भी दीजिये उड़ने को आसमां
तोड़ो हर एक रस्म की ज़ंजीर के लिए
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भूले मिसाल लोग भरत और राम की
भाई से भाई लड़ रहा जागीर के लिए
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कहते है इश्के आग सुलगती है दो तरफ़
उसपे अरुण को देखना तासीर के लिए
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© श्री अरुण कुमार दुबे
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