श्री अरुण कुमार दुबे
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री अरुण कुमार दुबे जी, उप पुलिस अधीक्षक पद से मध्य प्रदेश पुलिस विभाग से सेवा निवृत्त हुए हैं । संक्षिप्त परिचय ->> शिक्षा – एम. एस .सी. प्राणी शास्त्र। साहित्य – काव्य विधा गीत, ग़ज़ल, छंद लेखन में विशेष अभिरुचि। आज प्रस्तुत है, आपकी एक भाव प्रवण रचना “एक मुफ़लिस रात भर …“)
☆ साहित्यिक स्तम्भ ☆ कविता # १४४ ☆
एक मुफ़लिस रात भर… ☆ श्री अरुण कुमार दुबे ☆
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दिल में जिसके प्यार का सागर लिए फिरता रहा
मुझको नफ़रत का वही खंज़र लिए फिरता रहा
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शहर में मँहगे है होटल कब्जे है फुटपाथ पर
एक मुफ़लिस रात भर चादर लिए फिरता रहा
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पूछ मत मुझसे गुज़ारा हिज़्र मैंने किस तरह
वस्ल का आँखों में बस मंजर लिए फिरता रहा
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बेचकर ईमान मैंने की नहीं जब नौकरी
उम्र भर सन्दूक और बिस्तर लिए फिरता रहा
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उसको कोई भी कभी मंज़िल न हासिल हो सकी
ज़िंदगी भर हार का जो डर लिए फिरता रहा
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उम्र से पहले बुढापा आ गया उस शख़्स को
दिल पे जो भी फ़िक़्र का पत्थर लिए फिरता रहा
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मुझको आश्रम में अरुण वो भेजने को आ गए
मैं जिन्हें बचपन में शानों पर लिए फिरता रहा
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© श्री अरुण कुमार दुबे
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