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 ☆ कवितेचा उत्सव ☆ दोन कविता ☆ सुश्री सुषमा गोखले ☆ 

[ 1 ]

अळवावरचे पाणी

गाई शाश्वताची गाणी

दंवबिंदूंचे मोती

स्थिरावले अस्थिरावरी

चिरंतन मैत्र जिवाचे

तारून नेई भवताप सारे !

                                    – सुषम

[ 2 ]

सुवर्णशर विंधितसे प्राण

मृग विस्मयभारित

तेजोमय भास्कर लखलखीत

केशर अबोली सुवर्णी किंचित

रंगपखरण चराचरावर

विशाल तरू भेदूनी येई

तेजोनिधी सहस्त्ररश्मी

प्रकाशाचे दान दैवी

धरेवर प्रभातरंगी

अलौकिक या तेजमहाली

ब्रम्हक्षणांची अनुभूती !

                                   –सुषम

© सुश्री सुषमा गोखले

शिवाजी पार्क – दादर

मो. 9619459896

≈ ब्लॉग संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – श्रीमती उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित  ≈

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