श्री आशिष  बिवलकर

 

?️?  चित्रकाव्य  ?️?

? ढोरं तरी बरी। वर्तनात ॥ ? श्री आशिष  बिवलकर ☆

अठरा वर्षांनी | पाळणा हलला |

आरसीबी झाला | जेतेपदी ||१||

*
बंगळूर मध्ये | विजयी आनंद |

क्रीडा प्रेम धुंद | विजयात ||२||

*

विना नियोजन | विजयाची यात्रा |

उत्साहाची मात्रा | अतिरेक ||३||

*

उसळली गर्दी | चेंगराचेंगरी |

अनागोंदी सारी | भोवताली ||४||

*

निष्पाप लोकांचे | नाहकच बळी |

मृत्यू अवकाळी | नशिबासी ||५||

*

क्रिकेटपटूंना | प्रसिद्धी व पैसा |

सामान्यांचा कैसा | जीव गेला ||६||

*

माणूस तो ऐके | फक्त ज्ञानेश्वरी |

ढोरं तरी बरी | वर्तनात ||७||

© श्री आशिष  बिवलकर

दि. 05 जून 2025

बदलापूर

मो 9518942105

≈संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडळ (मराठी) – सौ. उज्ज्वला केळकर/श्री सुहास रघुनाथ पंडित /सौ. मंजुषा मुळे/सौ. गौरी गाडेकर≈

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