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श्री सुजित कदम

(श्री सुजित कदम जी  की कवितायेँ /आलेख/कथाएँ/लघुकथाएं  अत्यंत मार्मिक एवं भावुक होती हैं. इन सबके कारण हम उन्हें युवा संवेदनशील साहित्यकारों में स्थान देते हैं। उनकी रचनाएँ हमें हमारे सामाजिक परिवेश पर विचार करने हेतु बाध्य करती हैं. मैं श्री सुजितजी की अतिसंवेदनशील  एवं हृदयस्पर्शी रचनाओं का कायल हो गया हूँ. पता नहीं क्यों, उनकी प्रत्येक कवितायें कालजयी होती जा रही हैं, शायद यह श्री सुजितजी की कलम का जादू ही तो है!  आज प्रस्तुत है  उनकी एक भावप्रवण  एवं संवेदनशील  कविता “पुस्तक ”)

☆ साप्ताहिक स्तंभ – सुजित साहित्य #35☆ 

☆ पुस्तक ☆ 

पुस्तकांच्या

दुकानात

गेल्यावर

मला

ऐकू येतात..;

पुस्तकात

मिटलेल्या

असंख्य

माणसांचे

हुंदके.. ;

आणि.. . . .

दिसतात

पुस्तकांच्या

मुखपृष्ठावर

ओघळलेले

आसवांचे

काही थेंब…!

© सुजित कदम, पुणे

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वा ऽऽऽ छान