सौ.वनिता संभाजी जांगळे
कविता
☆ पुलवामा… ☆ सौ.वनिता संभाजी जांगळे ☆
(१४ फ़रवरी २०१९)
☆
शायद वो भी करने चले थे
अपने प्यार का इज़हार
एक अनजान राह पे हो गये
भारत माँ के लिए कुर्बान
*
शहादत से था उन्हे प्यार
घर पेर वह कर रही थी इंतजार
तिरंगे में लपेटकर आया
रक्त से भीगी वर्दी में रंग लाल
*
उनके प्यार का ये रास्ता
लाल रंग में नहा गया
जिस दिन हमने तो
व्हॅलेंटाइन डे मनाया
*
दुश्मनों की बारूद से
सीना उनका चिर-चिर गया
प्यार का वो ढाई लफ्ज़
होठों पर ही थम गया
*
हर व्हॅलेंटाइन डे पर याद आयेगी
माँ के लालों के शहीद की कहानी
भारत माँ की हिफाज़त में दी
चौदह फरवरी की हर कुर्बानी
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© सौ.वनिता संभाजी जांगळे
जांभुळवाडी-पेठ, ता. वाळवा, जि. सांगली, दुरभाष्य क्रमांक- 9327282419
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈




