सुश्री इन्दिरा किसलय
☆ व्यंग्य ☆ मच्छर “दानी” ☆ सुश्री इन्दिरा किसलय ☆
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——डाटा-आटा-टाटा–आटा-घाटा-चांटा-काटा——-चिरकुट मच्छर ने कबीले के सरदार मच्छर से कहा-बाॅस लगता है आपको पुस्तक मेले से लाई हुई “तुकबंदी”की किताब पसंद आ गई है।कविता लिखने का मूड है शायद !
सरदार दहाड़ा—हमारे पास किन्तु परन्तु इफ बट अगर मगर का कोई काम नहीं।
जोकुछ है एकदम साॅलिड है।
चिरकुट चिरौरी करने लगा-माई बाप! कई भूत(पूर्व) सरदार बेशक कविताई,पेंटिंग में माहिर थे।एक तो हवाई जहाज उड़ाता था।पर आप तो”फेंक”भी लेते हैं,उड़ना उड़ाना,जिमिंग,कुकिंग,ड्रमवादन नौकायन सभी कुछ कर लेते हैं।ऑल इन वन।गोडसे का मंदिर बनायेंगे कहते हैं लोग।आपका तो बनना ही चाहिए।
चिरकुट को सरदार ने सबासी दी।ऐसा है चिरकुट-हमने अच्छे अच्छे पोर्टफोलिओ लेडी मच्छर “एनोफिलीस”को दे रखे हैं।वे जनसेवा में पारंगत हैं।मीडिया में वक्त बेवक्त भूं भूं करती रहती हैं।जनता भुनभुन में उलझी रहती है और हम पृथ्वी के इस छोर से उस छोर तक बिंदास उड़ते रहते हैं।
श्रीलंका ने हमें तड़ीपार कर दिया।इंडिया 2030 तक हमें डोडो बना देगा।ये मुंह और मसूर की दाल।हम अंगद का पांव हैं।डटे रहेंगे।
सोचो चिरकुट!अगर हम न हों तो “स्वच्छता अभियान”का क्या होगा।झाड़ूवाले बाबा का क्या होगा।”फार्मा कंपनियां” चांदी कैसे कूटेंगी।ओडोमास मार्टिन कछुआछाप क्लोरोक्विन———!तुम्हें पता है
हमने “उड़नशील यूनिवर्सिटी से एम ए भी किया है।लिंग्विस्टिक्स पढ़ा है।वक्त के साथ शब्दों के मानी बदल जाते हैं।अब “मच्छरदानी”का अर्थ मसहरी नहीं रहा।मच्छर “दानी” (कर्ण के समान दानी)हो गया है।चीनी मसहरी के आॅर्डर मिले तो चिंग चिंग हमारे तलुए चाट रहा है।डंकमारकला की देशव्यापी कार्यशालाओं के कारण नेता हमारे एहसानमंद हैं ।
चिरकुट तुम कह सकते हो कि “येभी कोई दान है?”
बस नज़रिए का फर्क है–‘”हुस्न रंगीन है न सादा है।बस अपनी अपनी निगाह होती है।”
इतना कहकर सरदार मच्छर फिर उड़ान भरने लगा।।
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© सुश्री इंदिरा किसलय
नागपुर
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





