श्री राजेश कुमार सिंह ‘श्रेयस’
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – श्रेयस साहित्य # ६७ ☆
☆ गद्य क्षणिका ☆ ~ एक मुठ्ठी चावल ~ ☆ श्री राजेश कुमार सिंह ‘श्रेयस’ ☆
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लाल लाल आँखों से तेरेरती समदेईया ने आखिरकार शांति पर अपना सारा गुस्सा उडेल दियाl शांति के हाथ भय के मारे काँप उठेl परिणाम यह हुआ कि खौलते हुए चावल का सारा मांड़ शांति के पैर पर ही पलट गयाl वह दर्द से चीख पड़ीl शांति की ग़लती बस इतनी ही हुई, कि उसने बिना सासु माँ से पूछे, एक मुठ्ठी चावल, भूखे भिखारी को दे दिया थाl
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© श्री राजेश कुमार सिंह “श्रेयस”
लखनऊ, उप्र, (भारत )
दिनांक 22-02-2025
≈ संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈



