श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’

(ई-अभिव्यक्ति में श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’ जी का स्वागत। पूर्व शिक्षिका – नेवी चिल्ड्रन स्कूल। वर्तमान में स्वतंत्र लेखन। विधा –  गीत,कविता, लघु कथाएं, कहानी,  संस्मरण,  आलेख, संवाद, नाटक, निबंध आदि। भाषा ज्ञान – हिंदी,अंग्रेजी, संस्कृत। साहित्यिक सेवा हेतु। कई प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय स्तर की साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा अलंकृत / सम्मानित। ई-पत्रिका/ साझा संकलन/विभिन्न अखबारों /पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित। पुस्तक – (1)उमा की काव्यांजली (काव्य संग्रह) (2) उड़ान (लघुकथा संग्रह), आहुति (ई पत्रिका)। शहर समता अखबार प्रयागराज की महिला विचार मंच की मध्य प्रदेश अध्यक्ष। आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय लघुकथा – स्वर्ण चंपा।)

☆ लघुकथा # ९२ – स्वर्ण चंपा श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’

“यह कैसी पूजा बताया है आपने? यह पुष्प मुझे कहाँ मिलेगा?”

“ऐसा करिए आप फोन करके गौरी को ही बता दीजिए, गौरी जरूर ला देगी। ठीक है मैं बता देता हूं और पूजा की विधि शुरू करते हैं।”

“यह पुष्प देवी को चढ़ाने से सारी व्यथाएं दूर हो जाती हैं”, पंडित जी ने कहा।

गौरी की माता कमला जी ने कहा- “अरे! पंडित जी आप दुर्गा सप्तशती का पाठ करने के लिए आए हैं?”

“आपने तो हमारी मुश्किल बढ़ा दी। अब मैं यह कहाँ से लाऊंगी? साधारण चंपा के पुष्प तो लाकर रख हैं, गुड़हल का पुष्प हम देवी को चढाते हैं।”

“आप हमेशा नई-नई विधियां बता कर मुझे हैरान करते हो।”

गौरी को पंडित जी ने फोन लगाकर पुष्प के बारे में बताया और लाने के लिए कहा।

गौरी ने कहा- “ठीक है पंडित जी चिंता मत करिए। ऑनलाइन बहुत सारे ऐप है ऑर्डर कर दिया है आप पूजा करते रहिए। मैं समय से पुष्प लेकर घर पहुंच जाऊंगी।”

सफेद गोरा रंग गौरी का था और उसने पीली साड़ी पहन रखी थी एकदम साक्षात वह स्वयं स्वर्ण चंपा लग रही थी।पुष्प की सुगंध और गौरी को देखकर संपूर्ण मंदिर ऊर्जा मान हो रहा था।

जय माँ अंबे गौरी की आरती गूंज रही थी मंदिर में।

माताजी भी प्रसन्न थी उनकी बिटिया रानी हर मुश्किल में मां का साथ देती है। स्वर्ण चंपा पुष्प आज देखकर वह प्रसन्न थी और मंदिर में सभी श्रद्धालु ने भी पहली बार इस पुष्प के दर्शन किए थे।

पंडित जी ने ढेर सारा आशीर्वाद दिया और कहा तुम्हारे घर में ही साक्षात लक्ष्मी के रूप में गौरी बिटिया है।

© श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’

जबलपुर, मध्य प्रदेश मो. 7000072079

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

Please share your Post !

Shares
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments