डॉ.राजेश ठाकुर
( प्रो डॉ राजेश ठाकुर जी का मंतव्य उनके ही शब्दों में – “पाखण्ड, अंध विश्वास, कुरीति, विद्रूपता, विसंगति, विडंबना, अराजकता, भ्रष्टाचार के खिलाफ़ जन-समुदाय को जागृत करना ही मेरी लेखनी का मूल प्रयोजन है…l” अब आप प्रत्येक शनिवार डॉ राजेश ठाकुर जी की रचनाएँ आत्मसात कर सकते हैं. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण रचना “माँ नर्मदे…“.)
कविता – नर्मदा जयन्ती विशेष – माँ नर्मदे… ☆ प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर
👏1
लालसा तेरे दर्शन की माँ नर्मदे,
है तमन्ना मैं पाऊँ माँ तेरे ही चरण
मोक्षदायिनी शिवकन्या हे इंदुभवा,
बालूवाहिनी मैं आऊँ माँ तेरी ही शरण ll
👏2
अमरकण्टक से खम्भात सौगात माँ,
परिक्रमण करते हैं भक्त दिन-रात माँ
दुग्धधारा कपिलधारा सहस्त्रधारा माँ,
धुँआधार से हृदयप्रदेश ने पुकारा माँ
धुँआधार से हृदयप्रदेश ने पुकारा माँ…….
स्वेद महाकाल का जब धरा पर गिरा,
मैया रेवा का पावन हुआ अवतरण ll
लालसा…………
👏3
गंगास्नान से पुण्य जैसा मिले,
तेरे दरस मात्र से पुण्य वैसा मिले
हर्षदायिनी विपाशा शंकरी अमृता,
रंजना सरसा मुरला हे मेकलसुता
तरण तारण माँ तमसा तेरा अनुकरण,
माँ तेरा अनुसरण माँ तेरा स्मरण ll
लालसा………
👏4
गंदगी का वरण करते जो अशिष्ट हैं,
गोद में तेरी मिलाते अपशिष्ट हैं
श्रद्धा कैसी यह शुद्धता का हरण,
कैसा वातावरण पवित्रता का क्षरण ll
विमले माँ को प्रदूषण से मुक्ति मिले,
अगर जन करें न अंधानुकरण ll
लालसा………
👏5
शपथ लें कि कलकल पवित्र जल में हम
पावन जल में न मिलायें,मूत्र-मल को हम
दोहराएँ न कल कपट-छल को हम
सहज भक्ति-भाव,इस सरल हल को हम
हे नरबदा हे मैया मकरवाहिनी,
साफ़-सुथरा हो अपना ये पर्यावरण ll
लालसा……..
👏6
कूड़ा-कर्कट-मल,जल में न डालें हम
नदिया शुद्धि का ‘राजेश‘, हल निकालें हम
निर्मला सलिला हे कलकल प्रवाहिनी,
जीवन-रेखा देवी मकरवाहिनी
भक्ति आराधना आरती कीर्तन,
तेरी ही गोद में मेरा जीवन-मरण ll
लालसा……….
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© प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर
शासकीय कॉलेज़ केवलारी
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