सुश्री मंजिरी “निधि”
(बड़ोदा से सुश्री मंजिरी “निधि” जी की गद्य एवं छंद विधा में विशेष अभिरुचि है और वे साथ ही एक सफल महिला उद्यमी भी हैं। आज प्रस्तुत है आपकी कविता ‘शिक्षा‘।)
कविता – शिक्षा ☆ सुश्री मंजिरी “निधि”
(चौपाई छंद)
शिक्षा नूतन पथ दिखलाती
शिक्षा ही तो मान दिलाती l
सत्य राह चलना सिखलाती
संस्कृति से परिचय करवाती ll
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शिक्षा का हम अलख जगाएं
जीवन का तम दूर भगाएं l
शिक्षा बिन नर पशु है जानो
शिक्षा का मतलब पहचानो ll
*
सारे जग का है यह नारा
फैले शिक्षा का उजियारा l
करना कारज कोई न्यारा
बहे देश में शिक्षा धारा ll
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© सुश्री मंजिरी “निधि”
बड़ोदा, गुजरात
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






