मिर्ज़ा अज़ीज़ बेग

?  कविता – सत्य की स्वीकारोक्ति  ? मिर्ज़ा अज़ीज़ बेग ☆

कुछ सवाल पूछता हूँ

परछाई से, प्रतिबिंब से

ग़म और आंसुओं से

उदासी से और तन्हाई से

जवाब जो आता है

प्रतिध्वनियों के चक्रवात में

उलझ जाता है

पहले के भी,

कितने ही प्रश्न

जैसे अंतरिक्ष की कक्षाओं में

भटकते परिक्रमा कर रहे हैं

शायद विधान मेरे प्रश्नों के उत्तर

अस्वीकारता है

क्योंकि शायद मैं

तयशुदा जीवन की व्यवस्था से

विद्रोह के स्वर में पूछता हूँ

दुविधा यह है कि, किसी हद तक

” यह सही है ” मैं भी क़ुबूलता हूँ…!!!!!

© मिर्ज़ा अज़ीज़ बेग

संपर्कबिलासपुर (छ ग) मो नं 8319743682

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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जगत सिंह बिष्ट
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