श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश”

(सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश” जी का  हिन्दी बाल -साहित्य  एवं  हिन्दी साहित्य  की अन्य विधाओं में विशिष्ट योगदान हैं। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में रचना सहित 145 बालकहानियाँ 8 भाषाओं में 1160 अंकों में प्रकाशित। प्रकाशित पुस्तकेँ-1- रोचक विज्ञान कथाएँ, 2-संयम की जीत, 3- कुएं को बुखार, 4- कसक, 5- हाइकु संयुक्ता, 6- चाबी वाला भूत, 7- बच्चों! सुनो कहानी, इन्द्रधनुष (बालकहानी माला-7) सहित 4 मराठी पुस्तकें प्रकाशित। मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी का श्री हरिकृष्ण देवसरे बाल साहित्य पुरस्कार-2018 51000 सहित अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित व पुरस्कृत। साप्ताहिक स्तम्भ “श्री ओमप्रकाश जी का साहित्य”  के अंतर्गत साहित्य आप प्रत्येक गुरुवार को आत्मसात कर सकते हैं। आज प्रस्तुत है कहानीकार: डॉ. रघुराज सिंह ‘कर्मयोगी’ जी द्वारा लिखित बाल कहानी संग्रह – “नानी-दादी की वैज्ञानिक अनमोल कहानियांकी समीक्षा।)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ – श्री ओमप्रकाश जी का साहित्य # २३२

☆ पुस्तक चर्चा ☆ नानी-दादी की वैज्ञानिक अनमोल कहानियां – कहानीकार: डॉ. रघुराज सिंह ‘कर्मयोगी’ ☆ श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ 

​पुस्तक: नानी-दादी की वैज्ञानिक अनमोल कहानियां

कहानीकार: डॉ. रघुराज सिंह कर्मयोगी

प्रकाशक: स्वयं कहानीकार

पृष्ठ: 151 (सजिल्द)

मूल्य: 300

समीक्षक: ओमप्रकाश क्षत्रिय प्रकाश

तकनीकी विषयों पर बालकों के लिए एक बेहतरीन पुस्तक

​बच्चों के लिए तकनीकी विषयों पर बहुत कम लिखा गया है। इसका मुख्य कारण यह है कि तकनीकी भाषा कठिन, क्लिष्ट और दुरूह होती है। उस पर कितनी ही सहजता और सरलता से कलम चलाई जाए, फिर भी पूर्ण सरलता नहीं आ पाती, क्योंकि तकनीकी शब्दों का उपयोग उसी भाषा के अनुरूप करना पड़ता है। हिंदी में ऐसे शब्दों के सहज विकल्प कम प्रचलित हैं।

दूसरा कारण यह है कि तकनीकी शब्दावली अक्सर अंग्रेजीनिष्ठ व वैज्ञानिक होती है। हिंदी में अभी तक इतने वृहद स्तर पर प्रयास नहीं किए गए हैं कि इन शब्दों के लिए सरल व प्रचलित हिंदी शब्द उपयोग में लाए जा सकें। इन कारणों से, जब कोई रचनाकार वैज्ञानिक और तकनीकी विषयों पर लिखता है, तो रचना रोचक और रोमांचक तो होती है, मगर उसमें भाषागत जटिलता आ जाती है और बाल-सुलभ सहजता की कमी रह जाती है।

​इन चुनौतियों के बावजूद, डॉ. रघुराज सिंह ‘कर्मयोगी’ ने इस दिशा में एक अभिनव प्रयास किया है ताकि बच्चों को तकनीकी विषयों पर बाल-सामग्री उपलब्ध हो सके। उन्होंने वैज्ञानिक उपलब्धियों, भारत में विज्ञान और अंतरिक्ष के क्षेत्र में बढ़ते कदमों जैसे अनेक विषयों को सहजता से उठाया है।

​डॉ. कर्मयोगी ने विविध तकनीकी विषयों को चुनकर उन पर रचनाएं तैयार की हैं। उन्होंने धातु विज्ञान, अंतरिक्ष विज्ञान, चंद्र अभियान (रोवर, लैंडर, दक्षिणी ध्रुव), कृषि, हरित क्रांति, खाद्य समस्या, मिसाइल कार्यक्रम, अणु-परमाणु, और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) जैसे अनेक विषयों पर अपनी कलम चलाई है।

​समीक्ष्य पुस्तक में रचनाओं के शीर्षक न केवल विषय-वस्तु को, बल्कि उसके मर्म को भी प्रदर्शित करते हैं। रचनाकार ने विशेष ध्यान रखा है कि रचना बोझिल न हो। इसी उद्देश्य से ‘नानी-दादी’ के संवादों के माध्यम से तकनीकी जानकारी को सरल और ग्राह्य बनाया गया है।

​रचनात्मक क्षेत्र में ऐसे प्रयास कम ही देखने को मिलते हैं। चूंकि डॉ. रघुराज सिंह का जुड़ाव रेलवे से रहा है, इसलिए उन्होंने रेलवे की तकनीकी जानकारी पर भी काफी लिखा है और उन्हें इसके लिए पुरस्कृत भी किया गया है।

​कुल मिलाकर, यह पुस्तक तकनीकी विषयों को रोचकता के साथ प्रस्तुत करती है। बच्चों द्वारा विज्ञान को जानने, समझने और आत्मसात करने के लिए यह एक बेहतरीन पुस्तक है। आशा है कि तकनीकी क्षेत्र की रचना होने के कारण इसका खुले दिल से स्वागत किया जाएगा। पुस्तक की छपाई उत्तम है, हालाँकि कहीं-कहीं जल्दबाजी में संपादन की कमी (सफाई) अखरती है। मूल्य उचित है।

© श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश”

13/12/2025

संपर्क – 14/198, नई आबादी, गार्डन के सामने, सामुदायिक भवन के पीछे, रतनगढ़, जिला- नीमच (मध्य प्रदेश) पिनकोड-458226

ईमेल  – opkshatriya@gmail.com मोबाइल – 9424079675 /8827985775

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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ओमप्रकाश क्षत्रिय 'प्रकाश'

बहुत ही बढ़िया प्रस्तुतीकरण आदरणीय।