सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’

(संस्कारधानी जबलपुर की सुप्रसिद्ध साहित्यकार सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ ‘जी सेवा निवृत्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश, डिविजनल विजिलेंस कमेटी जबलपुर की पूर्व चेअर पर्सन हैं। आपकी प्रकाशित पुस्तकों में पंचतंत्र में नारी, पंख पसारे पंछी, निहिरा (गीत संग्रह) एहसास के मोती, ख़याल -ए-मीना (ग़ज़ल संग्रह), मीना के सवैया (सवैया संग्रह) नैनिका (कुण्डलिया संग्रह) हैं। आप कई साहित्यिक संस्थाओं द्वारा पुरस्कृत एवं सम्मानित हैं। आप प्रत्येक शुक्रवार सुश्री मीना भट्ट सिद्धार्थ जी की अप्रतिम रचनाओं को उनके साप्ताहिक स्तम्भ – रचना संसार के अंतर्गत आत्मसात कर सकेंगे। आज इस कड़ी में प्रस्तुत है आपकी एक अप्रतिम गीतजाग सखी री

? रचना संसार # ७४ – गीत – जाग सखी री…  ☆ सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’ ? ?

जाग सखी री उतर क्षितिज से

आया सुखकर भोर।

*

उदयाचल से झाँक रहा है,

देखो शुभदे दिनकर।

बादल अभिनंदन करते हैं,

सूर्यदेव का हँसकर।।

तुहिन कणों के अगणित मोती,

बिखरे चारों ओर ।

*

जाग सखी री उतर क्षितिज से,

आया सुखकर भोर ।।

**

महकी देखो सुभग वाटिका,

लदी सुमन से डाली।

पंचम स्वर में कूक रही है,

कोयलिया मतवाली।।

मन को आनंदित करता सखि,

मधुप -वृंद का शोर ।

*

जाग सखी री उतर क्षितिज से,

आया सुखकर भोर ।।

**

सरिता के तट चकवा- चकवी,

गीत प्रणय के गाते।

बड़े सवेरे उठे बटोही,

अपने पथ पर जाते।।

नभ में ओझल हुआ सुधाकर,

दिखता व्यथित चकोर ।

*

जाग सखी री उतर क्षितिज से,

आया सुखकर भोर ।।

© सुश्री मीना भट्ट ‘सिद्धार्थ’

(सेवा निवृत्त जिला न्यायाधीश)

संपर्क –1308 कृष्णा हाइट्स, ग्वारीघाट रोड़, जबलपुर (म:प्र:) पिन – 482008 मो नं – 9424669722, वाट्सएप – 7974160268

ई मेल नं- meenabhatt18547@gmail.com, mbhatt.judge@gmail.com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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