श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश”
(सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश” जी का हिन्दी बाल -साहित्य एवं हिन्दी साहित्य की अन्य विधाओं में विशिष्ट योगदान हैं। अनेक पत्र-पत्रिकाओं में रचना सहित 145 बालकहानियाँ 8 भाषाओं में 1160 अंकों में प्रकाशित। प्रकाशित पुस्तकेँ-1- रोचक विज्ञान कथाएँ, 2-संयम की जीत, 3- कुएं को बुखार, 4- कसक, 5- हाइकु संयुक्ता, 6- चाबी वाला भूत, 7- बच्चों! सुनो कहानी, इन्द्रधनुष (बालकहानी माला-7) सहित 4 मराठी पुस्तकें प्रकाशित। मध्यप्रदेश साहित्य अकादमी का श्री हरिकृष्ण देवसरे बाल साहित्य पुरस्कार-2018 ₹51000 सहित अनेक संस्थाओं द्वारा सम्मानित व पुरस्कृत। साप्ताहिक स्तम्भ “श्री ओमप्रकाश जी का साहित्य” के अंतर्गत साहित्य आप प्रत्येक गुरुवार को आत्मसात कर सकते हैं। आज प्रस्तुत है लेखिका: डॉ. श्रीमती युगल सिंह जी द्वारा लिखित – “हाड़ौती अंचल का बाल साहित्य: उद्भव एवं विकास” की समीक्षा।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – श्री ओमप्रकाश जी का साहित्य # २३३ ☆
☆ पुस्तक चर्चा ☆ हाड़ौती अंचल का बाल साहित्य: उद्भव एवं विकास – लेखिका: डॉ. श्रीमती युगल सिंह ☆ समीक्षा – श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ ☆
पुस्तक : हाड़ौती अंचल का बाल साहित्य: उद्भव एवं विकास
लेखिका: डॉ. श्रीमती युगल सिंह
प्रकाशक: जीएस पब्लिशर डिस्ट्रीब्यूटर्स, नवीन शाहदरा, दिल्ली
पृष्ठ संख्या:161
मूल्य: 595/- रुपये
समीक्षक: ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश‘
डॉ. श्रीमती युगल सिंह द्वारा रचित पुस्तक ‘हाड़ौती अंचल का बाल साहित्य: उद्भव एवं विकास’ (2025) न केवल एक ऐतिहासिक दस्तावेज़ है, बल्कि राजस्थानी और हिंदी साहित्य के क्षेत्र में इसकी अत्यधिक उपादेयता (महत्व) भी है। यह कृति इस दृष्टि से अत्यंत उपयोगी है कि यह एक उपेक्षित रहे क्षेत्र ‘हाड़ौती’ के बाल साहित्य को मुख्यधारा में लाने का गंभीर प्रयास करती है।
पाँच वर्षों के कठिन परिश्रम और शोध के बाद तैयार की गई यह पुस्तक भविष्य के शोधार्थियों के लिए एक आधार स्तंभ का कार्य करेगी, जिससे प्रेरित होकर इस अंचल पर और भी गंभीर शोध कार्य किए जा सकेंगे। इसकी सबसे बड़ी उपादेयता यह है कि लेखिका ने बिखरे हुए साहित्य और साहित्यकारों को एक सूत्र में पिरोकर 45 रचनाकारों का एक प्रामाणिक संदर्भ ग्रंथ तैयार किया है, जो पहले कभी उपलब्ध नहीं था।
ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से यह पुस्तक हाड़ौती की भाषाई जड़ों को समझने के लिए अनिवार्य है। यह रेखांकित करती है कि हाड़ौती की प्रथम मुद्रित कृति बाइबिल का अनुवाद थी और सूर्यमल्ल मिश्रण की ‘राम रंजाट’ से इस अंचल के बाल साहित्य की नींव पड़ी। पुस्तक की संरचना विधा-वार (कविता, कहानी, नाटक, ज्ञान-विज्ञान, पहेलियाँ) होने के कारण यह पाठकों को साहित्य की विविध प्रवृत्तियों से परिचित कराती है। काव्य क्षेत्र में सुरेशचंद्र सर्वहारा, श्यामा शर्मा, जितेन्द्र निर्मोही, रामगोपाल राही, डॉ. कृष्णा कुमारी, महेश पंचोली, राधेश्याम मेहर, शशि सक्सेना, सुरेश चंद्र निगम, शिवराज श्रीवास्तव, अक्षयलता शर्मा, भगवती प्रसाद गौतम, डॉ. सुश्री लीला मोदी, ममता महक, प्रीतिमा पुलक, विष्णु शर्मा ‘हरिहर’, विश्वामित्र दाधीच, जयसिंह आशावत, देवकी दर्पण, शिवचरण सेन ‘शिवा’, डॉ. प्रेम जैन, डॉ. गिरि गिरिवर, उमानंदन चतुर्वेदी और योगीराज योगी जैसे कवियों के योगदान का विस्तार से वर्णन है। लेखिका ने कविताओं के माध्यम से यह भी दिखाया है कि कैसे मातृभाषा से जुड़ाव बच्चों में संस्कार और अनुशासन का बीजारोपण करता है।
गद्य और नवीन विधाओं के संकलन के कारण भी इस कृति की महत्ता बढ़ जाती है। इसमें डॉ. नरेंद्र नाथ चतुर्वेदी, संतोष पारिक ‘निरव’, विजय जोशी, विजय शर्मा , टीकमचंद ढोडरिया, किशन रतनानी, डॉ. क्षमा चतुर्वेदी, कालीचरण राजपूत, रोचिका अरुण शर्मा और रेखा पंचोली की कहानियों और उपन्यासों का विवरण है, जो बाल-मनोविज्ञान पर आधारित हैं।
वैज्ञानिक चेतना के विकास में जितेन्द्र निर्मोही और प्रज्ञा गौतम का योगदान, तथा नाटक के क्षेत्र में योगेश ‘यथार्थ’ और राम शर्मा (कापरैन) के कार्यों की चर्चा इसकी बहुआयामी उपादेयता को सिद्ध करती है। झालावाड़ के अब्दुल मलिक खान के साहित्य को ‘रत्न’ मानकर उन्हें संरक्षित करना इस पुस्तक की एक बड़ी उपलब्धि है। साथ ही, अपर्णा पाण्डेय, श्वेता शर्मा, अरनी राबर्ट्स, सी.एल. साँखला और प्रभात सिंघल के योगदानों को शामिल कर यह पुस्तक हाड़ौती अंचल के बाल साहित्य की एक पूर्ण और जीवंत तस्वीर पेश करती है, जो आने वाली पीढ़ियों को उनकी साहित्यिक विरासत से जोड़े रखेगी।
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© श्री ओमप्रकाश क्षत्रिय “प्रकाश”
19/12/2025
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