श्री श्याम खापर्डे
(श्री श्याम खापर्डे जी भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप प्रत्येक सोमवार पढ़ सकते हैं साप्ताहिक स्तम्भ – क्या बात है श्याम जी । आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता “रंग तो रंग है…”।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २५५ ☆
☆ # “रंग तो रंग है…” # ☆
☆
रंग तो रंग है
हर शै में उमंग है
कहीं पीला है कहीं नीला है
कहीं सफेद है कहीं लाल है
कहीं बैंगनी कहीं हरा है
कहीं जामुनी है कहीं काला है
हर कोई मतवाला है
सारा जमाना रंगों से सरोबार है
खूब रंगों का कारोबार है
पिचकारियों की धूम है
कहीं रंगों से झूमती टोली है
कहीं फूलों के रंगों की
सादगी पूर्ण होली है
कहीं इतराती, बचती बचाती बालाएं है
रंगों ने जिन्हें भिगो डाला है
उनके गले में रंग बिरंगी मालायें है
नये नये रंग लगायें है
नाचती हुई तरुणाई है
सब पर झूमती हुई होली आई है
वयस्क टीका लगा रहे हैं
भांग के नशे में युवा फाग गा रहे हैं
चंग और डफ बज रहे हैं
रंग-बिरंगे परिधानों में सब सज रहे
चहु और उल्लास उमंग छाई है
यह होली खुशियां लेकर आई है
पर कहीं पर सन्नाटा है
जिनके घर अभी-अभी बुलडोजर से टूटा है
वह आंसुओं की होली मना रहे हैं
भूखे पेट फिर भी फाग गा रहे हैं
आसमान में बिखरे कई रंग है
क्या उनके जीवन में कोई रंग उतर आएगा ?
क्या उनका यह होलिकोत्सव रोते-रोते ही बीत जाएगा ?
☆
© श्याम खापर्डे
फ्लेट न – 402, मैत्री अपार्टमेंट, फेज – बी, रिसाली, दुर्ग ( छत्तीसगढ़) मो 9425592588
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





