श्रीमती शशि सराफ
(श्रीमती शशिसुरेश सराफ जी सागर विश्वविद्यालय से हिंदी एवं दर्शन शास्त्र से स्नातक हैं. आपने लायंस क्लब और स्वर्णकार समाज की अध्यक्षा पद का भी निर्वहन किया. आपका “लेबल शशि” नाम से बुटीक है और कई फैशन शोज में पुरस्कार प्राप्त किये हैं. आपका साहित्य और दर्शन से अत्यधिक लगाव है. आप प्रत्येक शुक्रवार श्रीमती शशि सराफ जी की रचनाएँ आत्मसात कर सेंगे. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण कविता ‘खुशियों का पैगाम…‘।)
☆ शशि साहित्य # १८ ☆
कविता – खुशियों का पैगाम… ☆ श्रीमती शशि सुरेश सराफ
छा गई रुत खुशियों की,
किस बात का संदेशा ले आई …
मतवाला बन घुमड़ रहा है जी,
इस तपिश में बरसने,
जो बात मन को भायी…
खुशियां खिल रही वृक्षों पर,
कालियां भी मुस्कायी…
फूल रहे हैं बौर भी,
खिलखिला रही अमराई…
नदिया भी बल खा कर,
आंचल सा लहराई…
खुशबू संग लिए अपने,
गुनगुना रही है पुरवाई…
चांद जमीं पर उतर आया,
देख बहारों की तरुणाई…
तारों की बारात सजी है,
रस घोल रही है शहनाई…
हरषुं खुशियां दमक रही है,
गुम हो गई है तन्हाई…
छा गई रुत खुशियों की,
मनचाहा संदेशा ले आई…
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© श्रीमती शशि सराफ
जबलपुर, मध्यप्रदेश
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈






