डॉ.राजेश ठाकुर
( प्रो डॉ राजेश ठाकुर जी का मंतव्य उनके ही शब्दों में – “पाखण्ड, अंध विश्वास, कुरीति, विद्रूपता, विसंगति, विडंबना, अराजकता, भ्रष्टाचार के खिलाफ़ जन-समुदाय को जागृत करना ही मेरी लेखनी का मूल प्रयोजन है…l” अब आप प्रत्येक शनिवार डॉ राजेश ठाकुर जी की रचनाएँ आत्मसात कर सकते हैं. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण रचना “धर्म-कर्म…“.)
साप्ताहिक स्तम्भ ☆ नेता चरित मानस # २६
कविता – धर्म-कर्म… ☆ प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर
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अब न कैन्सिल हो पायेगी
रिटर्न टिकट कन्फर्म है प्यारे
यात्रा का आनन्द उठा लो,
लाइफ का ये मर्म है प्यारे
=2=
दौड़-धूप ऋण गुणा-भाग में
सपने जोड़ – घटाना है
उठा-पटक अप-डाउन तब भी
फ़र्ज़ तेरा सत्कर्म है प्यारे
=3=
इक दिन मिट्टी हो जाना,जीवन का यही तराना है
कभी हवा का शीतल झोंका,कभी जेठ-सा गर्म है प्यारे
=4=
लेखा-जोखा ले सबको,भवसागर पार उतरना है
परहित की पतवार से नैया,खेने में क्या शर्म है प्यारे
=5=
है ज़मीर मूलधन तेरा और क़िरदार तेरी पूँजी
‘राजेश’ मानवता से बढ़कर,नहीं कोई भी धर्म है प्यारे
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© प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर
शासकीय कॉलेज़ केवलारी
संपर्क — ग्राम -धतूरा, पोस्ट – जामगाँव, तहसील -नैनपुर, जिला -मण्डला (म.प्र.) मोबा. 9424316071
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