आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

(आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ जी संस्कारधानी जबलपुर के सुप्रसिद्ध साहित्यकार हैं। आपको आपकी बुआ श्री महीयसी महादेवी वर्मा जी से साहित्यिक विधा विरासत में प्राप्त हुई है । आपके द्वारा रचित साहित्य में प्रमुख हैं पुस्तकें- कलम के देव, लोकतंत्र का मकबरा, मीत मेरे, भूकंप के साथ जीना सीखें, समय्जयी साहित्यकार भगवत प्रसाद मिश्रा ‘नियाज़’, काल है संक्रांति का, सड़क पर आदि।  संपादन -८ पुस्तकें ६ पत्रिकाएँ अनेक संकलन। आप प्रत्येक सप्ताह रविवार को  “साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह” के अंतर्गत आपकी रचनाएँ आत्मसात कर सकेंगे। आज प्रस्तुत है  – ग़ज़ल – हरिऔध )

☆ साप्ताहिक स्तम्भ – सलिल प्रवाह # २७५ ☆

☆ ग़ज़ल – हरिऔध ☆ आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’ ☆

(अयोध्यासिंह उपाध्याय ‘हरिऔध'(15 अप्रैल, 1865-16 मार्च, 1947) हिन्दी के कवि, निबन्धकार तथा सम्पादक थे।)

हिंदी माँ के पुत्र यशस्वी हैं हरिऔध।

देह मिट गई सृजन सनातन हैं हरिऔध।।

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प्रिय प्रवासकर रहे जहाँ है लोक जगत।

राधा-विरह लोक हित से जोड़ें हरिऔध।।

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कृष्ण न केवल व्यक्ति, समष्टि समाए हैं।

निज सुख का परित्याग निरंतर है हरिऔध।।

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वैदेही वनवासत्याग-तप की गाथा।

सहन शक्ति नारी की, गायक हैं हरिऔध।।

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मंत्र-तंत्र है प्रकृति-चित्रण अलबेला।

मातृभूमि की चरण वंदना हैं हरिऔध।।

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गौरव गान विरासत का संबल बनता।

शीश उठाकर जीने का परचम हरिऔध।।

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सत्य-अहिंसा-जनसेवा को लक्ष्य बना।

स्वतंत्रता सत्याग्रह विजय ध्वजा हरिऔध।।

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दृष्टि कलात्मक फूल अधखिलालोक जुड़ी।

निज भाषा सम्मान प्रवर्तक हैं हरिऔध।।

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ऐक्य भाव, समरसता, सत्याग्रह, जनहित

जन कल्याण, लोक सेवा राही हरिऔध।।

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सुरवाणी-जनवाणी का छांदस संगम।

ठाठ ठेठ हिन्दी काहै चोखा हरिऔध।।

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वर्ण वृत्त से सजे चौपदे चोखेहैं।

राष्ट्रवाद के सच्चे गायक हैं हरिऔध।।

©  आचार्य संजीव वर्मा ‘सलिल’

१०.४.२०२६

संपर्क: विश्ववाणी हिंदी संस्थान, ४०१ विजय अपार्टमेंट, नेपियर टाउन, जबलपुर ४८२००१,

चलभाष: ९४२५१८३२४४  ईमेल: salil.sanjiv@gmail.com

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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