श्री अरुण कुमार दुबे
(वरिष्ठ साहित्यकार श्री अरुण कुमार दुबे जी, उप पुलिस अधीक्षक पद से मध्य प्रदेश पुलिस विभाग से सेवा निवृत्त हुए हैं । संक्षिप्त परिचय ->> शिक्षा – एम. एस .सी. प्राणी शास्त्र। साहित्य – काव्य विधा गीत, ग़ज़ल, छंद लेखन में विशेष अभिरुचि। आज प्रस्तुत है, आपकी एक भाव प्रवण रचना “रब का वो आसरा नहीं पाता…“)
☆ साहित्यिक स्तम्भ ☆ कविता # १५० ☆
रब का वो आसरा नहीं पाता… ☆ श्री अरुण कुमार दुबे ☆
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धूप औ छाँव क्या नहीं पाता
कर्म का फल बता नहीं पाता
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तेज कितना भी सूर्य तपता हो
फिर भी सागर सुखा नहीं पाता
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इश्क़ कैसा है बेवफ़ा को भी
चाहकर मैं भुला नहीं पाता
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साथ बरसों का है मेरा उससे
क्या है दिल में हवा नहीं पाता
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इंतिहां इंतज़ार की है अब
सब्र का फल पका नहीं पाता
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डर हो क़ानून का भला कैसे
सच्चा मुज़रिम सज़ा नहीं पाता
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रौनकें रह की देख जो बहके
वो सही रासता नहीं पता
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दीन दुखियों के जो न काम आए
रब का वो आसरा नहीं पाता
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© श्री अरुण कुमार दुबे
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