☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

🌹 चंद्रभान ‘राही’ के उपन्यास ‘अंतिम समय का सच’ और पत्रिका ‘अमृत दर्पण’ का गरिमामयी लोकार्पण ☆ साभार – श्री रमेश श्रीवास्तव🌹

भोपाल । न्यू भूमिका साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था के तत्वावधान में विगत दिनों एक भव्य साहित्यिक समारोह का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में वरिष्ठ साहित्यकार चंद्रभान ‘राही’ द्वारा रचित उपन्यास और त्रैमासिक पत्रिका ‘अमृत दर्पण’ का लोकार्पण एवं सारगर्भित साहित्य चर्चा संपन्न हुई।

कार्यक्रम की अध्यक्षता सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्री अश्विनी दुबे ने की। मुख्य अतिथि के रूप में हैदराबाद से पधारे डॉ. सुरेश मिश्रा उपस्थित रहे, जबकि विशिष्ट अतिथि के रूप में श्रीमती संध्या सिलावट ने शिरकत की।

समारोह का शुभारंभ माँ सरस्वती की वंदना से हुआ, जिसके पश्चात अतिथियों का स्वागत संस्था की उपाध्यक्ष अनीता जी द्वारा किया गया। कार्यक्रम के विभिन्न चरणों में वक्ताओं ने रचनाकर्म और समकालीन साहित्य पर अपने विचार साझा किए:

लेखकीय वक्तव्य: उपन्यासकार चंद्रभान ‘राही’ ने अपने रचनाकर्म से जुड़ी स्मृतियों को साझा करते हुए बताया कि उनका यह नवीन उपन्यास मनुष्य के जीवन के अंतिम सोपान (वृद्धावस्था) के मनोवैज्ञानिक द्वंद्व और संघर्षों पर केंद्रित है।

प्रख्यात समीक्षक इक़बाल मसूद ने पुस्तक की विस्तृत समीक्षा प्रस्तुत की। उन्होंने उपन्यास की शिल्पगत विशेषताओं और इसकी प्रासंगिकता पर प्रकाश डालते हुए इसे समाज का आईना बताया।

अतिथि उद्बोधन: विशिष्ट अतिथि संध्या सिलावट ने उपन्यास के कलेवर और कथानक की मुक्तकंठ से प्रशंसा की। वहीं, मुख्य अतिथि डॉ. सुरेश मिश्रा ने ‘अमृत दर्पण’ पत्रिका के अखिल भारतीय स्वरूप की सराहना करते हुए कहा कि यह पत्रिका देश भर के रचनाकारों को एक मंच प्रदान कर रही है। उन्होंने उपन्यास को एक उत्कृष्ट और पठनीय कृति करार दिया।

अपने अध्यक्षीय भाषण में अश्विनी दुबे ने कहा, “वही पत्रिका दीर्घजीवी और सफल होती है जो शासकीय अनुदान पर निर्भर न होकर स्वावलंबन के साथ साहित्य की सभी विधाओं को निष्पक्ष स्थान देती है।” उन्होंने राही जी के उपन्यास को मानवीय संवेदनाओं का जीवंत दस्तावेज़ बताया।

समारोह का कुशल संचालन डॉ. आज़म ने किया। कार्यक्रम के अंत में संस्था के अध्यक्ष श्री रमेश जी ने सभी पधारे हुए अतिथियों एवं साहित्यकारों के प्रति आभार व्यक्त किया।

इस अवसर पर नगर के प्रबुद्ध साहित्यकार और गणमान्य नागरिक बड़ी संख्या में उपस्थित रहे, जिनमें मुख्य रूप से सुदर्शन सोनी, सुरेश पटवा, अरुण अर्णव खरे, श्री धमीनिया, मंजू राही, चरणजीत सिंह कुकरेजा, अनिता तिवारी, शोभा जोशी, कमल प्रसाद कमल, महेश सोनी, अज़ीम आज़ाद और अशोक निर्मल शामिल थे। यह आयोजन अपनी बौद्धिक चर्चा और साहित्यिक शुचिता के कारण लंबे समय तक याद रखा जाएगा।

श्री रमेश श्रीवास्तव
अध्यक्ष, न्यू भूमिका साहित्यिक एवं सांस्कृतिक संस्था, भोपाल।

समाचार साभार – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘ विनम्र’

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

Please share your Post !

Shares
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments