☆ सूचनाएँ/Information ☆

(साहित्यिक एवं सांस्कृतिक समाचार)

☆ मध्य प्रदेश के स्कूलों में पहुँची ‘रोचक विज्ञान कथाएं’: बाल साहित्य और विज्ञान शिक्षा का अभिनव संगम – अभिनन्दन ☆

रतनगढ़ (निप्र)। मध्य प्रदेश के साहित्यिक और शैक्षिक परिदृश्य में एक प्रेरणादायक पहल सामने आई है। हिंदी बाल साहित्य के प्रतिष्ठित रचनाकार ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ की विज्ञान-आधारित कहानी संग्रह ‘रोचक विज्ञान कथाएं’ का द्वितीय संस्करण वर्ष 2025 में प्रकाशित हुआ है। यह संस्करण भारत सरकार के सूचना और प्रसारण मंत्रालय के प्रशासन विभाग द्वारा जारी किया गया है, जिसकी कीमत ₹145 निर्धारित की गई है। इस पुस्तक को राज्य शिक्षा केंद्र, मध्य प्रदेश द्वारा बल्क मात्रा में खरीदा गया है, जिसे प्रदेश के विभिन्न स्कूलों के पुस्तकालयों में विद्यार्थियों के अध्ययन हेतु वितरित किया जा रहा है।

यह संग्रह कुल 16 विज्ञान-आधारित कहानियों को समेटे हुए है, जो बच्चों की जिज्ञासा, कल्पनाशीलता और वैज्ञानिक सोच को प्रेरित करती हैं। कहानियाँ जैसे वज़न ग़ायब हो गया, इन्द्रधनुष बिखर गया, लड़ाई फूल, तने और पत्ती की, बन्दर-बाँट, नया साबुन कहाँ गया?, हवा का हवाई सफ़र, कुएँ को बुखार, बादल मर गया, श्रेष्ठ कौन, भूत का रहस्य, कुछ मीठा हो जाए, इंसेक्टा से मुलाक़ात, राफेल फिर जीत गया, मेरी आत्मकथा – हौमेटो, मोनिस्टा से मुलाक़ात, और काँव-काँव का भूत—इनमें विज्ञान की अवधारणाओं को रोचक घटनाओं और संवादों के माध्यम से प्रस्तुत किया गया है।

इन कहानियों में बच्चों का स्वप्न में अंतरिक्ष यान में उड़ान भरना, वैज्ञानिक प्रश्नों के उत्तर खोजने की उत्सुकता, और उपदेशों की बजाय व्यवहारिक अनुभवों से सीखने की प्रेरणा प्रमुख रूप से दिखाई देती है। साथ ही यह संदेश भी स्पष्ट रूप से उभरता है कि बच्चों की क्षमता को कम न आँका जाए और निःस्वार्थ भाव से सहायता करना भी वैज्ञानिक सोच का हिस्सा हो सकता है।

लेखक ओमप्रकाश क्षत्रिय ‘प्रकाश’ हिंदी बाल साहित्य में एक सृजनशील और प्रेरक हस्ताक्षर हैं। उनकी लेखनी में भारतीय संस्कृति, पर्यावरणीय चेतना और वैज्ञानिक दृष्टिकोण का सुंदर समन्वय देखने को मिलता है। ‘रोचक विज्ञान कथाएं’ उनकी उसी रचनात्मक सोच का विस्तार है, जो बच्चों को सोचने, समझने और प्रयोग करने के लिए प्रेरित करती है।

मध्य प्रदेश के स्कूलों में इस पुस्तक का पहुँचना न केवल शैक्षिक दृष्टि से लाभकारी है, बल्कि यह प्रदेश के साहित्यिक गौरव को भी राष्ट्रीय स्तर पर स्थापित करता है। यह संग्रह निश्चित रूप से बाल पाठकों के मन में विज्ञान के प्रति उत्सुकता और प्रेम जगाएगा, और उन्हें एक संवेदनशील, जिज्ञासु तथा रचनात्मक नागरिक बनने की दिशा में प्रेरित करेगा।

≈ श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

Please share your Post !

Shares
0 0 votes
Article Rating
Subscribe
Notify of
guest

0 Comments
Oldest
Newest Most Voted
Inline Feedbacks
View all comments