श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’
(ई-अभिव्यक्ति में श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’ जी का स्वागत। पूर्व शिक्षिका – नेवी चिल्ड्रन स्कूल। वर्तमान में स्वतंत्र लेखन। विधा – गीत,कविता, लघु कथाएं, कहानी, संस्मरण, आलेख, संवाद, नाटक, निबंध आदि। भाषा ज्ञान – हिंदी,अंग्रेजी, संस्कृत। साहित्यिक सेवा हेतु। कई प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय स्तर की साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा अलंकृत / सम्मानित। ई-पत्रिका/ साझा संकलन/विभिन्न अखबारों /पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित। पुस्तक – (1)उमा की काव्यांजली (काव्य संग्रह) (2) उड़ान (लघुकथा संग्रह), आहुति (ई पत्रिका)। शहर समता अखबार प्रयागराज की महिला विचार मंच की मध्य प्रदेश अध्यक्ष। आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय लघुकथा – वसुधैव कुटुंबकम ।)
☆ लघुकथा # ९९ – वसुधैव कुटुंबकम ☆ श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’ ☆
नेताजी अपने कार्यकर्ताओं के साथ गली मोहल्ले में घूम रहे थे घूमते- घूमते अचानक उनको एक बुढ़िया घर के बाहर बैठी दिखाई दी।
“अम्मा हमारे नेता जी को ही वोट देना। “
“चुनाव चिन्ह ध्यान से देख लो ?”
“अंगूठे का निशान इसी चिन्ह पर लगाना। ‘
नेता जी ने कहा -“माँ जी आपको कोई समस्या तो नहीं है?”
बुढ़िया (कमला) ने कहा -“बेटा मुझे कोई समस्या नहीं है अब इस उम्र में मैं खुद ही एक समस्या हूं। आजकल तो बहुत मजे हैं।”
“बेटा बहुत सारे नेता लोग आते हैं बहुत सारा सामान देकर जाते हैं, अनाज भी मिल जाता है पहले तो पेट भरने के लिए यहाँ -वहां भटकना पड़ता।”
“अब आराम से मेरी गुजर हो जाती है, मेरा आशीर्वाद है बेटा तुम जुग जुग जियो। “
“माता जी सब आप लोगों की दया दृष्टि है इस बार मेरा ध्यान रखना। अपने आसपास के भी सभी लोगों को कह देना। “
“ठीक है बेटा” बुढ़िया कमला ने कहा।
“बेटा थक गए होगे? थोड़ा आराम कर लो पानी पी लो चाय बना कर पिलाऊं बेटा?”
“ठीक है माँ पानी पिला दो। “
“बेटा आपने बहुत मान सम्मान दिया। मैं दिल से आशीर्वाद देती हूं। तुम ही जीतोगे पर एक बात ध्यान रखना कि जैसे हो सदा ऐसे ही रहना क्योंकि जीत के बाद बदल जाते हैं सब लोग। “
“मेरी क्या अपनी सगी माँ की भी सुध लेते……?”
“मेरे बेटे बहू भी शहर चले गए हैं मुझे यहाँ अकेले छोड़के यदि आपकी कृपा दृष्टि न होती बेटा तो कैसे चलता ?”
“बेटा मुझे अपना घर दिखा दो , आपकी माँ कैसी हैं उनसे मिलना चाहती हूँ। “
“बेटा मेरा बेटा भी बहुत बोलता था , हम सब उसे नेता जी कहते थे हमें ही धोखा दे दिया। “
कार्यकर्ता ने कहा- “अम्मा नेता जी बहुत बिजी हैं हम लोग एक दिन आपको जरूर लें चलेंगे। “
“वोट नेता जी को देना जीतने के बाद भोज में बुलाएंगे। “
“हमारे नेता जी वसुधैव कुटुंबकम में विश्वास करते हैं पूरे प्रदेश के लोगों को अपना परिवार मानते हैं। “
“अच्छा बेटा देखते हैं?”
कार्यकर्ता जयकारा लगाने लगते हैं।
“राम प्रसाद भैया की जय।”
“हमारा नेता कैसा हो रामप्रसाद भैया जैसा हो।”
जोर- जोर से जयकारे लग रहे थे।
वृद्ध अम्मा सोच रही थी कि – क्या सच में कोई प्रदेश को अपना परिवार समझता है बिना स्वार्थ के…। “
© श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’
जबलपुर, मध्य प्रदेश मो. 7000072079
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈




