श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’

(ई-अभिव्यक्ति में श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’ जी का स्वागत। पूर्व शिक्षिका – नेवी चिल्ड्रन स्कूल। वर्तमान में स्वतंत्र लेखन। विधा –  गीत,कविता, लघु कथाएं, कहानी,  संस्मरण,  आलेख, संवाद, नाटक, निबंध आदि। भाषा ज्ञान – हिंदी,अंग्रेजी, संस्कृत। साहित्यिक सेवा हेतु। कई प्रादेशिक एवं राष्ट्रीय स्तर की साहित्यिक एवं सामाजिक संस्थाओं द्वारा अलंकृत / सम्मानित। ई-पत्रिका/ साझा संकलन/विभिन्न अखबारों /पत्रिकाओं में रचनाएँ प्रकाशित। पुस्तक – (1)उमा की काव्यांजली (काव्य संग्रह) (2) उड़ान (लघुकथा संग्रह), आहुति (ई पत्रिका)। शहर समता अखबार प्रयागराज की महिला विचार मंच की मध्य प्रदेश अध्यक्ष। आज प्रस्तुत है आपकी एक विचारणीय लघुकथा – दोष किसका?)

☆ लघुकथा # १२६ – दोष किसका? श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’

लगातार हो रही मूसलाधार बारिश से शहर की सड़कें तालाब में बदल गई थीं। नालियाँ कूड़े से अटी पड़ी थीं और गंदा पानी घरों में घुसने लगा था। शर्मा जी छतरी लेकर दरवाजे पर खड़े बड़बड़ा रहे थे।

“बस करो बारिश! आखिर कितना सताओगी? पूरा शहर डुबोकर ही मानोगी क्या?”

सामने से गुजर रहे वर्मा जी ठिठक गए।

“शर्मा जी, बारिश को क्यों कोस रहे हैं?”

“क्यों न कोसूँ? देख नहीं रहे, सड़क पर कमर तक पानी है। घर में रखा सामान खराब हो रहा है। बच्चे बाहर नहीं निकल पा रहे। यह बारिश नहीं, आफत है आफत!”

वर्मा जी मुस्कराए, “बारिश आफत नहीं, प्रकृति का वरदान है।”

“वाह! आपके घर में पानी नहीं घुसा, इसलिए वरदान लग रही है।”

“मेरे घर में भी पानी घुसा है, लेकिन दोष बारिश का नहीं है।”

“तो किसका है? बादलों का?”

“नहीं, हमारी व्यवस्था का और हमारी लापरवाही का।”

शर्मा जी तुनककर बोले, “अब इसमें हमारी क्या गलती?”

वर्मा जी ने सड़क की ओर इशारा किया। नाली के मुहाने पर प्लास्टिक की थैलियाँ, बोतलें और कूड़े का ढेर जमा था।

“यह देखिए। नाली किसने बंद की?”

शर्मा जी चुप रहे।

“बारिश ने?”

शर्मा जी ने मुँह फेर लिया।

वर्मा जी फिर बोले, “नालियाँ समय पर साफ नहीं होंगी, कचरा नालियों में फेंका जाएगा, प्राकृतिक जल निकासी के रास्तों पर अतिक्रमण होगा और फिर हम बारिश को दोष देंगे—यह कहाँ का न्याय है?”

शर्मा जी कुछ नरम पड़े।

“लेकिन नगर निगम की भी तो जिम्मेदारी है।”

“बिल्कुल है। जल निकासी की समुचित व्यवस्था करना, नालियों की नियमित सफाई करना और जलभराव वाले क्षेत्रों का स्थायी समाधान करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। लेकिन शहर को साफ रखना नागरिकों का भी कर्तव्य है।”

अचानक नाली से निकला गंदा पानी सड़क पर फैलता हुआ शर्मा जी के दरवाजे तक आ पहुँचा।

वे घबराकर बोले, “अरे! मेरा सामान अंदर रखा है।”

वर्मा जी ने उनकी मदद करते हुए कहा, “यही पानी अगर सही रास्ते से निकल जाए तो मुसीबत नहीं, उपयोगी संसाधन है।”

शर्मा जी ने आश्चर्य से पूछा, “तो बारिश को दोष देना बंद कर दें?”

“बारिश को नहीं, अपनी सोच और व्यवस्था को सुधारिए।”

कुछ क्षण दोनों चुप रहे।

शर्मा जी ने सामने जमा कूड़े को देखा। फिर बोले, “कल मोहल्ले की बैठक बुलाएँगे। नालियों की सफाई के लिए नगर निगम में शिकायत करेंगे और लोगों को भी समझाएँगे कि कचरा नालियों में न डालें।”

वर्मा जी मुस्कराए, “अब बात बनी।”

आसमान से बारिश अब भी बरस रही थी। शर्मा जी ने पहली बार उसे शिकायत भरी नजरों से नहीं, बल्कि समझदारी भरी नजरों से देखा।

© श्रीमति उमा मिश्रा ‘प्रीति’

जबलपुर, मध्य प्रदेश मो. 7000072079

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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