श्री राजेन्द्र तिवारी
(ई-अभिव्यक्ति में संस्कारधानी जबलपुर से श्री राजेंद्र तिवारी जी का स्वागत। इंडियन एयरफोर्स में अपनी सेवाएं देने के पश्चात मध्य प्रदेश पुलिस में विभिन्न स्थानों पर थाना प्रभारी के पद पर रहते हुए समाज कल्याण तथा देशभक्ति जनसेवा के कार्य को चरितार्थ किया। कादम्बरी साहित्य सम्मान सहित कई विशेष सम्मान एवं विभिन्न संस्थाओं द्वारा सम्मानित, आकाशवाणी और दूरदर्शन द्वारा वार्ताएं प्रसारित। हॉकी में स्पेन के विरुद्ध भारत का प्रतिनिधित्व तथा कई सम्मानित टूर्नामेंट में भाग लिया। सांस्कृतिक और साहित्यिक क्षेत्र में भी लगातार सक्रिय रहा। हम आपकी रचनाएँ समय समय पर अपने पाठकों के साथ साझा करते रहेंगे। आज प्रस्तुत है आपका एक भावप्रवण कविता ‘युद्ध और धुआं…‘।)
☆ अभिव्यक्ति # १०४ ☆
☆ युद्ध और धुआं… ☆ श्री राजेन्द्र तिवारी ☆
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क्यों की हमने, प्रकृति से होड़,
क्यों लगाई हमने, प्रगति से दौड़,
क्या मिला हमें, आ गए हम कहां,
क्या मिला हमें, बस धुआं ही धुआं,
युद्ध में, कौन, जीता है आज तक,
जो भी लड़ा है, हारा ही है, आज तक,
अपनो को खो कर, कौन खुश हुआ,
जो भी जीता, वही हारा ही तो है,
शांति, कभी युद्ध का प्रति फल नहीं,
विध्वंस ही तो युद्ध का परिणाम है,
चारों तरफ बस गुबार ही गुबार,
शांति है कहां, बस धुआं ही धुआं,
ईर्ष्या, क्रोध, अहंकार, का, द्योतक है, युद्ध,
विनाशकारी, प्रलयंकारी होता, है युद्ध,
युद्ध में, युद्ध से कौन जीत सका है
सबका अहितकारी, ही तो है युद्ध,
क्या मिला, कब किसे, क्या कहां,
बस धुआं ही धुआं, बस धुआं ही धुआं.
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© श्री राजेन्द्र तिवारी
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