श्रीमती सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’
🌻कविता 💃🏼 महिला दिवस 8 मार्च 🌻
दोहा–
नारी तू नारायणी, बाँटे सबको प्यार ।
सृजन करें नव वंश की, रखे नही अधिकार।।
चौपाई – –
कुलवंती रसवंती प्यारी ,अलग-अलग रूपों में क्यारी।।
रहती मर्यादा है बाँधे , ह्दय सुकोमल धीरज कांधे ।।
बनी अन्नपूर्णा कल्याणी, ममता भरती मीठी वाणी ।।
सृजन करें शुभ वंशज नारी, हर विपदा को हँस कर टारी।।
दोहा—-
ममता कर अनमोल है, कहते वेद पुराण।
ऋणी रहे है देव भी, संकट करती त्राण।।
चौपाई – – –
सोनपरी बाबुल की प्यारी, बनी पराई है लाचारी।।
घर आँगन को हँस कर छोड़ा, नये घरो से नाता जोड़ा।।
मातु-पिता की बिटिया भोली,भ्रात कहे बंदुक की गोली।।
छू लेती है नभ के तारे, इनके शौक बड़े ही न्यारे।।
दोहा–
हर नारी के भाग में, प्रभु लिख दे वरदान।
शुभ लक्ष्मी है संग में, इनका हो सम्मान।।
चौपाई – – –
है अनगढ़ चमकीली मोती, दर्द मिले आंसू से धोती।
लेकर पलकों में सब बातें, जाग रही वो सारी रातें।।
लाज शरम की गठरी ओढ़े, सपनों को मुट्ठी में मोड़े।।
हर रिश्ते की प्रीत निभाई, फिर भी सब क्यों कहें पराई।।
दोहा–
मन की भाषा बोलती,रख नैनों का ध्यान।
मांग सिंदूर साजती, बनती पति पहचान।।
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© श्रीमति सिद्धेश्वरी सराफ ‘शीलू’
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈





