☆ जीवन यात्रा – 30 वर्ष का हुआ हिंदी आंदोलन परिवार – श्री संजय भारद्वाज, हिंदी आंदोलन परिवार, पुणे ☆

(भारतीय भाषाओं को रोटी से जोड़ने के लिए आंदोलन)

30 सितम्बर 2025,  हिंदी आंदोलन परिवार का 31वाँ स्थापना दिवस। सच कहूँ तो हिंआप केवल शब्द या संस्था भर नहीं है। हमारी संतान है हिंआप।

विवाह के लगभग ढाई वर्ष बाद हिंआप का जन्म हुआ। बच्चे के जीवन में गिरने-पड़ने-संभलने, उठने-चलने-दौड़ने के जो चरण और प्रक्रियाएँ होती हैं, वे सभी हिंआप के जीवन में हुईं। हमारी संतान अब नयनाभिराम युवा हो चुकी।

(श्रीमती सुधा संजय भारद्वाज)

स्मृतिचक्र घूम रहा है और लेखनी चल रही है। ईश्वर की अनुकम्पा, माता-पिता के आशीष और आत्मीय जनो की शुभकामनाओं के चलते सार्वजनिक जीवन में छोटी-सी ही सही, स्थापना मिली। इसके चलते प्रायः विभिन्न आयोजनों में जाना होता है। स्वागत/ सम्मानस्वरूप मिला पुष्पगुच्छ घर लाकर रख देता हूँ। ऊपर से बेहद सुंदर दिखते पुष्प तीन से चार दिन में पूरी तरह सूख जाते हैं। जड़ों से कटने पर यही स्थिति होती है।

हिंआप ने अपनी स्थापना के समय से ही काटने या तोड़ने के मुकाबले खिलने और जोड़ने की प्रक्रिया को अपनाया। हमने बुके के स्थान पर पौधे देने की परंपरा का अनुसरण किया,  विनम्रता से कहूँ तो कुछ अर्थों में सूत्रपात भी किया। पौधे मिट्टी से जुड़े होते हैं। इनमें वृक्ष बनने की संभावना अंतर्निहित होती है।

(साक्षात्कार लेतीं सुश्री वीनू जमुआर )

(प्रसिद्ध साहित्यिक-सामाजिक-सांस्कृतिक संस्था हिंदी आंदोलन परिवार, पुणे द्वारा अपने सफल  27वें वर्ष में प्रवेश करते समय पुनर्पाठ  के अंतर्गत  30 सितम्बर 2019 (रजत जयंती वर्ष ) को संस्था के संस्थापक अध्यक्ष  श्री संजय भारद्वाज जी से  सुश्री वीनु जमुआर जी की बातचीत आप निम्न लिंक पर क्लिक कर पढ़ सकते हैं )

👉 ☆ जीवन यात्रा – श्री संजय भारद्वाज, हिंदी आंदोलन परिवार, पुणे ☆

इसी संभावना को हिंआप में संगठन के स्तर पर लागू करने का प्रयास भी किया। सभी साथियों की प्रतिभा को यथासंभव समझकर उन्हें स्वयं को मांजने- तराशने के समुचित अवसर देते गए। इसमें वाचन,लेखन, प्रस्तुति से लेकर  व्यवस्थापन कुशलता, समूह में काम करने की वृत्ति, नेतृत्व, सहयोग, समयबद्धता, संचालन जैसे अनेक आयाम समाविष्ट हैं। मिट्टी से जुड़े रहने का लाभ यह हुआ कि कुछ वृक्ष बन चुके, कुछ पौधे हैं, कुछ अंकुर फूट रहे हैं, कुछ बीज बोये जा चुके। अत्यंत नम्रता से कहना चाहता हूँ कि इस प्रक्रिया के  चलते आज हिंआप के पास भविष्य की टीम भी तैयार है।

संस्था के सामूहिक प्रयासों ने ‘आंदोलन’ शब्द जिस अर्थ में ढल चुका था, उससे बाहर निकाल कर उसे ‘अभियान’ का अर्थ देने में सफलता पाई।

धारा के विरुद्ध काम करते समय प्राय: उपजने वाली निराशा और थकान का हिंआप सौभाग्य से अपवाद रहा। हर बीज से नया वृक्ष खड़ा करने की जिजीविषा इस उपवन को निरंतर विस्तृत करती रही।

(गांधी जी की सहयोगी रहीं डॉ. शोभना रानाडे और भारत को परम कंप्यूटर देने वाले डॉ विजय भटकर, साहित्यकार डॉ दामोदर खडसे द्वारा हिंदी आंदोलन परिवार के वार्षिक अंक ‘हम लोग’ का विमोचन. इस पत्रिका में प्रतिवर्ष १०० से अधिक रचनाकारों को स्थान दिया जाता है.)

हिंआप आशंका में संभावना बोने का मिशन है। नित विस्तृत होती परिधि में बीज से वृक्ष होने की संभावना को व्यक्त करती हिंआप के जन्म के आसपास के समय की अपनी एक रचना स्मरण हो आई।

 *

जलती सूखी ज़मीन,

ठूँठ-से खड़े पेड़,

अंतिम संस्कार की

प्रतीक्षा करती पीली घास,

लू के गर्म शरारे,

दरकती माटी की दरारें,

इन दरारों के बीच पड़ा

वो बीज…,

मैं निराश नहीं हूँ,

यह बीज मेरी आशा का केन्द्र है,

यह,

जो अपने भीतर समाये है

असीम संभावनाएँ-

वृक्ष होने की,

छाया देने की,

बरसात देने की,

फल देने की,

और हाँ;

फिर एक नया बीज देने की,

मैं निराश नहीं हूँ,

यह बीज

मेरी आशा का केन्द्र है।

* 

आशा बनी रही, भाषा टिकी रहे, हमारी संस्था, इस क्षेत्र में कार्यरत हर संस्था चलती रहे उस दिन तक, जिस दिन भारतीय भाषाएँ शासन- प्रशासन, शिक्षा-दीक्षा, न्याय-अनुसंधान, हर क्षेत्र में  वांछित स्थान पूरी तरह बना लें।

तथास्तु!

 

संजय भारद्वाज

अध्यक्ष – हिंदी आंदोलन परिवार

(भारतीय भाषाओं को रोटी से जोड़ने के लिए आंदोलन) 

अध्यक्ष– हिंदी आंदोलन परिवार सदस्य– हिंदी अध्ययन मंडल, पुणे विश्वविद्यालय, एस.एन.डी.टी. महिला विश्वविद्यालय, न्यू आर्ट्स, कॉमर्स एंड साइंस कॉलेज (स्वायत्त) अहमदनगर संपादक– हम लोग पूर्व सदस्य– महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी ट्रस्टी- जाणीव, ए होम फॉर सीनियर सिटिजन्स 

मोबाइल– 9890122603

संजयउवाच@डाटामेल.भारत

writersanjay@gmail.com

संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’≈

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Latika
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एक सार्थक प्रयास किया है जो फलीभूत हो गया है। संस्था से जुड़े सभी पदाधिकारियों का अभिनंदन!👌💐