श्री तीरथ सिंह खरबंदा
(ई-अभिव्यक्ति में सुप्रसिद्ध व्यंग्यकार श्री तीरथ सिंह खरबंदाजी का हार्दिक स्वागत। आपने विधि विषय में पीएच.डी की उपाधि प्राप्त की है। व्यंग्य लेखन के क्षेत्र में सतत सक्रिय, विभिन्न प्रतिष्ठित पत्र-पत्रिकाओं में नियमित लेखन-प्रकाशन तथा हलफनामा, इक्कीसवीं सदी के अंतरराष्ट्रीय श्रेष्ठ व्यंग्यकार एवं हमारे समय के धनुर्धारी व्यंग्यकार, साझा संकलनों में रचनाएँ प्रकाशित। वर्ष 2023 में पहला व्यंग्य संग्रह “सुना है आप बहुत उल्लू हैं” प्रकाशित हुआ। वर्ष 2024 में दूसरा व्यंग्य संग्रह “झूठ टोपियाँ बदलता रहा” प्रकाशित हुआ। वर्ष 2022 में भारतीय स्टेट बैंक द्वारा स्पंदन साहित्य सम्मान। संप्रति : इंदौर में विधि एवं साहित्य के क्षेत्र में सतत सक्रिय। आज प्रस्तुत है आपका एक अप्रतिम व्यंग्य – उनकी चक्की का पता पूछते हैं लोग।)
☆ व्यंग्य ☆ उनकी चक्की का पता पूछते हैं लोग ☆ श्री तीरथ सिंह खरबंदा ☆
मोटेपन और चक्की का अद्भुत संबंध होता है लोगे अक्सर नव मोटे व्यक्तियों से उनकी चक्की का पता पूछते पाए जाते हैं । बताते हैं कि पश्चिम के देशों में पिछले दिनों तोंद का फैशन चला था उन दिनों बगैर तोंद वाले युवकों को युवतियाँ रिजेक्ट कर रही थीं, पता नहीं हमारे यहाँ यह फैशन अभी तक क्यों नहीं आ पाया है । यहाँ तो उल्टी हवा बह रही है मोटापा कम करने के लिए लोग हेल्थ क्लब, योगा क्लासों की तरफ दौड़ लगा रहे हैं । कई तो योगासन, व्यायाम करते-करते थक जाते हैं, सुबह-शाम भ्रमण करते जूते घिस जाते हैं परंतु वजन कम होने के बजाए इस तर्ज पर बढ़ता ही चला जाता है कि मर्ज़ बढ़ता ही गया ज्यों-ज्यों दवा की ।
पिछले दिनों मोटेपन से संबंधित चंद समाचारों ने मेरा ध्यान आकर्षित किया, अब उन पर मैं आपका ध्यान चाहता हूँ । पहला समाचार था कि – सावधान कहीं आप मोबाइल फोन से मोटेपन के शिकार न हो जाएँ ! और विशेष समाचार विदेश से था कि सुविधा के साधनों में वृद्धि होने से इस शताब्दी के मध्य तक व्यक्तियों का औसत वजन दस किलोग्राम ज्यादा हो जाएगा ।
कहते हैं जब जागो तब सवेरा, तथा देर आए दुरुस्त आए, हम जब जागे तो मोटापा दुरुस्ती हेतु किस्म किस्म की दुकानें हमारे यहाँ भी खुल गईं । स्लिम फास्ट की दुकान वाले भी यह काम लगातार पूरी गारण्टी पर कर रहे हैं । सुनते हैं कि इसकी रोकथाम के लिए शीघ्र ही बाजार में कई नई वैक्सीन भी आ जाएँगी । हालांकि कुछ पेटू किस्म के लोगों का कहना है कि इन उपायों से मोटापन अस्थायी रूप से बिदा होकर बिन बुलाए मेहमान की तरह चंद दिनों के बाद ही पुनः लौट आता है ।
भाग्यवादी मानते हैं कि मोटापन, दुबलापन, लंबापन, छोटापन ये सब प्रकृति के उपहार हैं और मोटापन उनमें से एक अमूल्य उपहार है । एक विज्ञापन में जैसे बतलाया जाता था कि लिखते-लिखते लव हो जाता है, ठीक वैसे ही हँसते-हँसते व्यक्ति मोटा भी हो जाता है । कहते हैं हँसोड़ क्लब इसी सूत्र वाक्य की प्रेरणा से बने हैं । कहते हैं कि कभी कभी व्यक्ति हँसने पर फंस भी जाता है शायद इसीलिए कुछ लोग कहते हुए पाए जाते हैं कि ‘हँसा तो फँसा’ – ये शब्द जब स्त्रीलिंग रूप में व्यवहार में लाए जाते हैं तो वे अत्यंत जोखिम भरे हो जाते हैं जिनसे कहने वाले की साख उलट-पलट सकती है ।
सूत्र बतलाते हैं कि पिछले दिनों मोटेपन से त्रस्त व्यक्तियों ने अपना एक अलग संगठन बना लिया है । अपने वर्ग के लोगों को देखकर ये अत्यंत प्रफुल्लित होते हैं । वे अपने पक्ष में कहते हैं कि हमारे वर्ग का व्यक्ति ईमानदार होता है । वह कभी भी गिरहकट या जेबकतरा नहीं हो सकता है, दौड़ भाग के काम से अक्सर वह दूर ही रहना पसंद करता है । वह कभी भी भ्रष्टाचारी नहीं होता है, भरे पेट की नीयत एकदम साफ होती है । ऐसा व्यक्ति भरपूर जीवन जीता है भरपूर खाता और भरपूर पीता है और फिर भरपूर चैन की नींद सोता है । मोटे व्यक्ति के लिए राजनीति के सँकरे द्वार भी चौड़े हो जाते हैं । दरअसल ऐसे व्यक्ति जहां भी एक बार बैठ या खड़े हो जाएँ वे अपनी जगह खुद ब खुद बना लेते हैं ।
आजकल ऐसे लोगों की राजनीति में जबरदस्त मांग बनी हुई है इसीलिए राजनीति में नए नए आए दुबले पतले महत्वाकांक्षी व्यक्ति शीघ्र ही अपने आकार प्रकार में चौतरफा प्रगति कर लेते हैं । दरअसल राजनीति में ऐसे व्यक्ति ही नेतृत्व करते जँचते हैं । और सच कहें तो ऐसे लोगों का ही आजकल राजनीति में बहुमत है । पैदल चलना इन्हें बिल्कुल भी नहीं सुहाता है इनसे पैदल चलने को कहना इनके लिए किसी कठोर सजा सुनाने से कम नहीं है ।
ईर्ष्यालु किस्म के कुछ लोग कहते फिरते हैं कि मोटापन एक बीमारी है जिसे ये लोग एक कोरी अफवाह बतलाते हैं और उस पर बिल्कुल विश्वास नहीं करते हैं, इस अफवाह के पीछे ये नितांत दुबले-पतले लोगों का हाथ बतलाते हैं और कहते हैं कि वे लोग अक्सर हमसे जलते रहते हैं ।
जानकार बताते हैं कि जो मोटापन जन्म से होता है वही असली है और जो जन्म के बाद विकसित होता है वह नकली किस्म का होता है । असली मोटापन कभी भी निठल्लेपन से पनपा हुआ नहीं होता है और न ही कभी वह पराये धन से पोषित होता है । असली मोटेपन पर व्यक्ति गर्व करता है, जबकि नकली पर अक्सर शर्मिंदा होता है । असली मोटेपन पर व्यक्ति स्वयं हँसता है जबकि नकली पर दूसरे । असली मोटापन तो ईश्वर का वरदान है, हम उसकी बनाई गई समस्त आकार प्रकार कि अनूठी आकृतियों को नमन करते हैं ।
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© श्री तीरथ सिंह खरबंदा
ई-मेल : tirath.kharbanda@gmail.com
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈




