श्रीमती छाया सक्सेना ‘प्रभु’
(ई-अभिव्यक्ति में संस्कारधानी की सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्रीमती छाया सक्सेना ‘प्रभु’ जी द्वारा “व्यंग्य से सीखें और सिखाएं” शीर्षक से साप्ताहिक स्तम्भ प्रारम्भ करने के लिए हार्दिक आभार। आप अविचल प्रभा मासिक ई पत्रिका की प्रधान सम्पादक हैं। कई साहित्यिक संस्थाओं के महत्वपूर्ण पदों पर सुशोभित हैं तथा कई पुरस्कारों/अलंकरणों से पुरस्कृत/अलंकृत हैं। आपके साप्ताहिक स्तम्भ – व्यंग्य से सीखें और सिखाएं में आज प्रस्तुत है एक विचारणीय रचना “त्यौं-त्यौं उज्ज्वल होय…”। इस सार्थक रचना के लिए श्रीमती छाया सक्सेना जी की लेखनी को सादर नमन। आप प्रत्येक गुरुवार को श्रीमती छाया सक्सेना जी की रचना को आत्मसात कर सकेंगे।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – आलेख # 210 ☆ त्यौं-त्यौं उज्ज्वल होय… ☆
जिस कार्य को आप कर रहे हैं उसमें आपको शत प्रतिशत योग्य होना चाहिए और ये योग्यता एक पल में नहीं मिल जाती, इसके लिए सतत परिश्रम, धैर्य, योग्यता, कुछ कर गुजरने का जज़्बा, किसी भी परिस्थिति में हार न मानने का प्रण।
जब आप सफ़लता के नजदीक होते हैं तभी लोग एक- एक कर साथ छोड़ने लगते हैं, कारण शीर्ष पर खड़े होना सबके बस की बात नहीं होती इसीलिए वे दूर हो जाते हैं। ऐसे समय में कदम पीछे करने के बजाय पूरी ताकत के साथ बढ़ते रहना चाहिए क्योंकि लक्ष्य की राह में कोई और नहीं आ सकता यहाँ तक कि स्वयं के मन का भय भी नहीं। केवल मंजिल पर निगाह हो, एक रास्ता बंद हो तो दूसरा खोजें, राह भी बनानी पड़े तो बनाएँ पर अपनी जीत सुनिश्चित करें।
तिनके – तिनके जोड़ के, कुनबा लिया बनाय।
नेह भाव मन में बसे, करिए सतत उपाय।।
जीवन में कई बार ऐसा होता है कि आप ने सब कुछ अपने परिश्रम से बनाया पर एक झटके में वो सब बिखर गया, ऐसे में बिल्कुल भी निराश होने की आवश्यकता नहीं है ये मंत्र सदैव याद रखें जो होता है अच्छे के लिए होता है, कोई भी आपका सब कुछ छीन सकता है पर भाग्य नहीं छीन सकता। अपने को हमेशा समय के साथ अपडेट करते रहें, तकनीकी का ज्ञान ऐसे समय में आपकी सहायता करता है आप अध्ययन करते रहें निरंतर अपनी योग्यता को बढ़ाते रहें।
किसी ऐसे विषय का चयन करें जिसमें आपकी विशेष रुचि हो उसी को विस्तारित करते रहें विश्वास रखें एक न एक दिन दुनिया आपका लोहा मानेगी। बिना मेहनत के यदि आपने कुछ हासिल कर भी लिया तो उसका कोई अर्थ नहीं है, योग्यता सबसे जरूरी होती है योग्य व्यक्ति ही समाज में अपना स्थान बना पाता है।
© श्रीमती छाया सक्सेना ‘प्रभु’
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