श्री राकेश कुमार

(श्री राकेश कुमार जी भारतीय स्टेट बैंक से 37 वर्ष सेवा के उपरांत वरिष्ठ अधिकारी के पद पर मुंबई से 2016 में सेवानिवृत। बैंक की सेवा में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान के विभिन्न शहरों और वहाँ  की संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिला। उनके आत्मकथ्य स्वरुप – “संभवतः मेरी रचनाएँ मेरी स्मृतियों और अनुभवों का लेखा जोखा है।” ज प्रस्तुत है आलेख की शृंखला – “देश -परदेश ” की अगली कड़ी।)

☆ आलेख # 141 ☆ देश-परदेश – टोकन ☆ श्री राकेश कुमार ☆

शब्द अंग्रेज़ी से है, लेकिन अब हमारे देश के सभी भागों में प्रतिदिन अनेक स्थानों पर उपयोग किया जाता है। बैंक उद्योग इसका उपयोग ग्राहक को अधिकतर भुगतान के लिए करते थे। जब सरकारी कार्यों के लिए बैंक में बहुत अधिक भीड़ रहती थी, तो ग्राहक टोकन प्राप्त कर लेने पर ये ही मान लेता था “Well begun is half done”

अनेक विदेशी भोजनालय, भोजन से पूर्व भुगतान लेकर एक स्टैंड जिस पर अंक या कोई निशान बना रहता है, ग्राहक को थमा देता, जिसको वो अपने टेबल पर रख देता है, ताकि वेटर उनकी पहचान कर सके। कुछ जगह तो टोकन से आवाज़ भी आ जाती, इसका तात्पर्य ये होता है, आप काउंटर पर जा कर आर्डर का भोजन स्वयं उठा सकें। हमारे देश में तो काउंटर वाला जोर से नंबर या आपका नाम लेकर भी आवाज़ दे देता है या आपके पहने हुए कपड़े के रंग आदि से पुकार लेता है।

डॉक्टर के क्लिनिक पर भी पेपर टोकन आदि देकर रोगी को इंतजार करवाया जाता है। हमारे घर के पास एक डॉक्टर साहब के यहां प्लास्टिक का टोकन दिया जाता था। रोगी के परिचित टोकन लेकर घर चले जाते थे, और टोकन वापस तक नहीं करते थे, इसलिए अब वहां गत्ते के टोकन कर दिए गए हैं। पुराने समय में एक डॉक्टर साहब के वहां तो कोई भी सिक्का रख कर नंबर लगता था, उस समय तो एक पैसे से लेकर दो रुपए के सिक्के जेब में भरपूर रहते थे।

“टोकन मनी” शब्द प्रॉपर्टी के सौदे में अग्रिम भुगतान के लिए उपयोग होता है। अंग्रेजी में token of love कहकर विवाह आदि में लिफाफा या कोई वस्तु भेंट स्वरूप दिए जाने की परंपरा बन चुकी है।

अंगूठा, प्रणाम, इमोजी आदि, जो भी आप हमारे व्हाट्स ऐप आलेखों पर अंकित करते हैं, वो सब भी तो हमारे प्रति आपके स्नेह का एक टोकन ही तो है।

© श्री राकेश कुमार

संपर्क – B 508 शिवज्ञान एनक्लेव, निर्माण नगर AB ब्लॉक, जयपुर-302 019 (राजस्थान)

मोबाईल 9920832096

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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