श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’
(हमप्रतिष्ठित साहित्यकार श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ जी के आभारी हैं जो साप्ताहिक स्तम्भ – “विवेक की पुस्तक चर्चा” शीर्षक के माध्यम से हमें अविराम पुस्तक चर्चा प्रकाशनार्थ साझा कर रहे हैं । श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र जी, मुख्यअभियंता सिविल (म प्र पूर्व क्षेत्र विद्युत् वितरण कंपनी, जबलपुर ) पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। तकनीकी पृष्ठभूमि के साथ ही उन्हें साहित्यिक अभिरुचि विरासत में मिली है। उनका दैनंदिन जीवन एवं साहित्य में अद्भुत सामंजस्य अनुकरणीय है। इस स्तम्भ के अंतर्गत हम उनके द्वारा की गई पुस्तक समीक्षाएं/पुस्तक चर्चा आप तक पहुंचाने का प्रयास करते हैं।
आज प्रस्तुत है आपके द्वारा लिखित “व्यंग्य : कल आज और कल…” पर आपका आत्मकथ्य।
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक की पुस्तक चर्चा# १८९ ☆
☆ “व्यंग्य : कल आज और कल” – ☆ आत्मकथ्य – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ☆
पुस्तक चर्चा
पुस्तक – “व्यंग्य : कल आज और कल”
लेखक – विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’
पृष्ठ संख्या – १६६
प्रकाशक – न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन दिल्ली
मूल्य – २२४ रु
☆ एक दार्शनिक एवं सांस्कृतिक अन्वेषण – – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ☆
व्यंग्य विधा के समय के साथ बदलते स्वरूप, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं पर प्रकाश डालती यह नई किताब है। ‘व्यंग्य आलोचना के वर्गीकरण बिंदुय् लेख व्यंग्य के मूल्यांकन के लिए आवश्यक सैद्धांतिक ढांचे और मानदंडों की पड़ताल करती है, यह समझने का प्रयास है कि व्यंग्य की आलोचनात्मक समझ कैसे विकसित हो सकती है। पुस्तक व्यंग्य की अभिव्यक्ति की विविधता को भी रेखांकित करती है। काव्य रचनाओं में हास्य, व्यंग्यऔर हिंदी नाटकों में व्यंग्य जैसे लेख स्पष्ट करते हैं कि कैसे कविता की सघनता और नाटक की नाटकीयता में भी व्यंग्य अपनी पैनी धार बनाए रखता है। नुक्कड़ नाटकों में प्रायः व्यंग्य ही वह रोचक अस्त्र होता है जो दर्शकों को बांधे रखता है। इसी तरह लघुकथा में जो चमत्कृत करता अंत किये जाने की परंपरा दृष्टव्य है उसमें भी व्यंग्य का सहारा लघुकथा को आकर्षक बनाता है। ‘व्यंग्य के विविध आयाम’ लेख विधा की बहुरूपता को और विस्तार से व्याख्यायित करता है।
166 पृष्ठ की पुस्तक में व्यंग्य विषयक 22 अध्याय हैं। समकालीन महिला व्यंग्यकारों की चर्चा पर एक अध्याय है। परसाई, त्यागी, जोशी जी पर स्वतंत्र आलेख हैं तो समकालीन व्यंग्यकारों से चर्चा भी शामिल है। किताब का मूल्य 224 रु में अमेजन पर सुलभ है। पुस्तक न्यू वर्ल्ड पब्लिकेशन दिल्ली से अच्छे कागज पर साफ तरीके से पेपर बैक आवरण में प्रकाशित है। व्यंग्य संदर्भ है।
चर्चाकार… विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’
समीक्षक, लेखक, व्यंगयकार
ए २३३, ओल्ड मीनाल रेसीडेंसी, भोपाल, ४६२०२३, मो ७०००३७५७९८
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≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक मंडल – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈







