श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – विवेक सहित्य # ३८६ ☆
दुबई से ~ लंबी फ्लाइट की तैयारी ~
श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ☆
इन दिनों दुबई से
ग्लोबल विलेज वाली दुनियां में लंबी घंटों की थका देने वाली उड़ान का नाम सुनते ही मन में सफर शुरू हो जाता है। दुबई से न्यूयॉर्क तक के पंद्रह घंटे , एक सीट पर वही लंबी सुरंग हैं जिसमें यात्री अपने धैर्य, शरीर और आदतों की परीक्षा खुद देता चलता है। ऐसी यात्रा में असुविधा का बीज छोटी सी चूक से भी उग आता है। इसलिए तैयारी केवल बैग पैक करने का काम नहीं, बल्कि मन और शरीर को उड़ान के हिसाब से ढालने की कला है।
सबसे पहली तैयारी सीट चुनने से शुरू होती है। यूं तो विमान में हर सीट एक ही दिशा में जाती है, लेकिन अनुभव अलग अलग होता है। जिसे बाहर झांकना अच्छा लगता है वह खिड़की वाला स्थान चुन कर खुद को थोड़ी राहत दे सकता है, और जिसे पैरों को फैलाने की आजादी चाहिए वह बीच वाले रास्ते के पास बैठे तो यात्रा कहीं ज्यादा संयत हो जाती है। शरीर ऐसे लम्बे समय में सबसे तेजी से थकता है, इसलिए कपड़े हल्के और ढीले होने चाहिए ताकि नसें खून का दौरान बनाएं रखें। शरीर उड़ान के हर उतार चढ़ाव के साथ सहज रह सके।
हैंड बैगेज की तैयारी में छोटी छोटी चीजें बड़ा काम करती हैं। गर्दन को थामने वाला तकिया, आंखों को रोशनी से बचाने वाला मास्क, पसंद का संगीत, कुछ हल्के स्नैक्स, मॉइश्चराइज़र और चार्जर जैसे मित्र पूरी उड़ान में साथ देते हैं और परेशानियों को उससे पहले ही रोक लेते हैं जब वे आकार भी नहीं ले पातीं। उड़ान के दौरान शरीर हाइड्रेटेड रखना चाहिए। अच्छा हो कि फ्लाइट से पहले नहा कर फ्रेश ढीले कपड़े पहनकर रेडी हो। अक्सर लोग विमान में चाय, कॉफी या सोडा के भरोसे रहते हैं, पर ये पेय शरीर की नमी खींच लेते हैं और लंबी उड़ान में यही छोटी गलती कई गुना भारी पड़ती है। नमी की कमी केवल गला नहीं सुखाती, बल्कि सिरदर्द, थकान और चिड़चिड़ापन बढ़ाती है। हमें जेट लेग से निपटना होता है इसलिए अपनी बाडी क्लाक को नींद के मामले में उस देश के समय के अनुरूप पहले से ही ढालने का यत्न करें जहां आप जाने वाले हैं।
लंबे सफर की असली चुनौती यह है कि पंद्रह घंटे सीट से चिपके रहने का मन तो बना लिया जाता है, पर शरीर इसे स्वीकार नहीं करता। हर दो तीन घंटे में उठकर कुछ कदम चल लेने और पैरों को स्ट्रेच करने से रक्त संचार सुचारू बना रहता है और बेचैनी कम होती है। दुनिया भर के डॉक्टर लगातार चेताते हैं कि एक ही स्थिति में बहुत देर तक बैठे रहने से नसों में अवांछित गांठें बनने का खतरा बढ़ता है, इसलिए सफर में थोड़ी चहल कदमी दवा जैसी काम करती है।
केबिन की हवा अपनी अलग ही प्रकृति रखती है। जमीन की हवा जितनी नम रहती है उड़ान की हवा उतनी ही सूखी होती है। ऐसे में त्वचा और होंठ बार बार यह याद दिलाते हैं कि उन्हें भी थोड़ा ध्यान चाहिए। एक हल्का मॉइश्चराइज़र और लिप बाम इस पूरे मौसम परिवर्तन को सरल बना देते हैं।
भोजन को लेकर भी समझदारी जरूरी है। भारी खाना ऊंचाई पर और कठिन लगता है।
फ्लाइट में परोसे जाना वाला भोजन फ्री हो सकता है पर अपनी सेहत के अनुसार ही लिया जाना चाहिए।हल्का और संतुलित भोजन पेट और मन दोनों को शांत रखता है।
यात्रा केवल शारीरिक नहीं होती, मानसिक भी होती है। इतने लंबे सफर में खिड़की के बाहर की दुनिया कई घंटे तक एक समान दिखती है, वही आसमान बस , ऐसे में मन के लिए मनोरंजन की तैयारी भी जरूरी है। कुछ किताबें, डाउनलोड की हुई फिल्में या संगीत एक अदृश्य सहयात्री बन जाते हैं और समय को बेहतर तरीके से आगे बढाते हैं। अगर कोई दवा नियमित रुप से लेनी है तो उसे साथ रखना और उड़ान के हिसाब से उसका समय तय कर लेन बुद्धिमानी भरा कदम है।
इसके साथ ही दस्तावेजों की जांच उड़ान की अनिवार्य जरूरत है। कई यात्री लंबी यात्रा की चिंता में सबसे साधारण गलती इसी मोड़ पर कर बैठते हैं। इसलिए पासपोर्ट, टिकट और वीजा को अंतिम बार देखकर ही यात्रा की शुरुआत करना मन की शांति को अगले कई घंटों तक सुरक्षित रखता है। इमिग्रेशन के संभावित सवाल जवाब पहले ही सोच लेना चाहिए। जिस देश में जाना हो वहां के नियमों को समझ लेना चाहिए, उदाहरण के लिए दुबई में खसखस भूल कर भी न ले जाएं। अमेरिका में कोई प्रतिबंधित बीज, या प्रतिबंधित दवाएं आदि न ले जाएं। जो मेडिसिन रखें उनका प्रिस्क्रिप्शन साथ रखें।
इन सारी तैयारियों का मकसद एक ही है कि लंबी यात्रा थकान के बोझ से मुक्त होकर एक शांत और यादगार अनुभव बन सके। उड़ान चाहे कितनी भी लंबी हो, थोड़ी सजगता और थोड़ी समझदारी उसे सहज ही सरल बना देती है।
☆
© श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’
म प्र साहित्य अकादमी से सम्मानित वरिष्ठ व्यंग्यकार
इन दिनों दुबई में
संपर्क – ए 233, ओल्ड मिनाल रेजीडेंसी भोपाल 462023
मोब 7000375798, ईमेल apniabhivyakti@gmail.com
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈




