डॉ भावना शुक्ल

(डॉ भावना शुक्ल जी  (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान  किया है। हम ईश्वर से  प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं – भावना के दोहे – ऋतु बसंत)

☆ साप्ताहिक स्तम्भ  # ३११ – साहित्य निकुंज ☆

☆ भावना के दोहे – ऋतु बसंत ☆ डॉ भावना शुक्ल ☆

कलियाँ गाती गीत है, पहने नित परिधान।

भंवरे गुंजन कर रहे, बनते वह नादान।।

 *

ऋतु बसंत की आ गई, करें वृक्ष शृंगार।

लता झूमती पेड़ पर, करे प्रेम इजहार।।

 *

 प्रेम प्यार के गीत का, पल्लव गाते गान।

लता झूमती प्यार में, वृक्षों पर मुस्कान।।

 *

आया फागुन झूम के, लिखें फाग के गीत।

हुई विदाई शीत की, ओ प्यारे मनमीत।।

© डॉ भावना शुक्ल

सहसंपादक… प्राची

प्रतीक लॉरेल, J-1504, नोएडा सेक्टर – 120,  नोएडा (यू.पी )- 201307

मोब. 9278720311 ईमेल : bhavanasharma30@gmail.com

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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