डॉ भावना शुक्ल
(डॉ भावना शुक्ल जी (सह संपादक ‘प्राची‘) को जो कुछ साहित्यिक विरासत में मिला है उसे उन्होने मात्र सँजोया ही नहीं अपितु , उस विरासत को गति प्रदान किया है। हम ईश्वर से प्रार्थना करते हैं कि माँ सरस्वती का वरद हस्त उन पर ऐसा ही बना रहे। आज प्रस्तुत हैं – भावना के दोहे – मेरा प्यारा गाँव।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ # ३१३ – साहित्य निकुंज ☆
☆ भावना के दोहे – मेरा प्यारा गाँव ☆ डॉ भावना शुक्ल ☆
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यादों में बस झूलता, मेरा प्यारा गाँव ।
खूब मजा लेते सभी, ठंडी ठंडी छाँव।।
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मिलजुलकर रहते सभी, कच्चे ईट मकान।
साथ सुख – दुख बांट रहे, उनकी है पहचान।।
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चलो गाँव की ओर सभी, मिले वहाँ सुख चैन।
याद बहुत आती मुझे, ठंडी – ठंडी रैन।।
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आती गर्मी देख लो, तपन बढ़ेगी खूब।
संगी साथी गाँव में, नहीं लगेगी ऊब।।
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© डॉ भावना शुक्ल
सहसंपादक… प्राची
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≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈




