श्री श्याम खापर्डे

(श्री श्याम खापर्डे जी भारतीय स्टेट बैंक से सेवानिवृत्त वरिष्ठ अधिकारी हैं। आप प्रत्येक सोमवार पढ़ सकते हैं साप्ताहिक स्तम्भ – क्या बात है श्याम जी । आज प्रस्तुत है आपकी भावप्रवण कविता परीक्षा…”।

☆ साप्ताहिक स्तम्भ ☆ क्या बात है श्याम जी # २५६ ☆

☆ # “परीक्षा…” # ☆

जीवन के हर मोड़ पर

हर पल हर क्षण

विधाता परीक्षा लेता है

एक सबक सबको देता है

छोटा हो या बड़ा

गरीब हो या अमीर

सबको एक मौका देता है

बचपन में पाठशाला होती है

मिडिल स्कूल होती है

उसके बाद हायर सेकेंडरी

उसके बाद कॉलेज में

आगे की पढ़ाई होती है

कॉलेज से निकलकर

जीवन के  अथाह सागर में

आपके ज्ञान की

तजुर्बा और

स्किल की आजमाइश होती है

स्पर्धा के इस युग में

गला काट प्रतियोगिता होती है

कुछ पास होते हैं

कुछ फेल होते हैं

दृढ़ निश्चय  वाले

निराशा में संयम नहीं खोते हैं

कई बार प्रयास करते हैं

कभी जीत तो कभी हार होती है

संघर्ष के इस दौर में

मेहनत और संकल्प से

हर कठिनाई पार होती है

ज्ञान के सागर की कोई सीमा नहीं है

ज्ञान प्राप्त करने का कोई फार्मूला

कोई तेज या कोई धीमा नहीं है

बस लगन, कड़ी मेहनत और समर्पण ही जरूरी है

इसके बिना लक्ष्य प्राप्त करने की जिद अधूरी है

यह आपके जीवन के हर ध्येय की समीक्षा है

जीवन भर हर व्यक्ति को कदम कदम पर देनी पड़ती परीक्षा है /

© श्याम खापर्डे 

फ्लेट न – 402, मैत्री अपार्टमेंट, फेज – बी, रिसाली, दुर्ग ( छत्तीसगढ़) मो  9425592588

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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