श्री एस के कपूर “श्री हंस”
☆ “श्री हंस” साहित्य # १९८ ☆
☆ मुक्तक ।। हे माँ दुर्गा पापनाशनी, तेरा वंदन बारम्बार है ।। ☆ श्री एस के कपूर “श्री हंस” ☆
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=1=
सुबह शाम की आरती और माता का जयकारा।
सप्ताह का हर दिन बन गया शक्ति का भंडारा।।
केसर चुनरी चूड़ी रोली हे माँ करें तेरा सब श्रृंगार।
सिंह पर सवार माँ दुर्गा आयी बन भक्तों का सहारा।।
=2=
तेरे नौं रूपों में समायी शक्ति बहुत असीम है।
तेरी भक्ति से बन जाता व्यक्ति संस्कारी प्रवीण है।।
हे वरदायनी पपनाशनी चंडी रूपा कल्याणी तू।
लेकर तेरे नाम मात्र से हो जाता व्यक्ति दुखविहीन है।।
=3=
नौं दिन की नवरात्रि मानो कि ऊर्जा का संचार है।
भक्ति में लीन तेरे भजनों की नौ दिन भरमार है।।
कलश सकोरा जौ और पानी आस्था के प्रतीक।
हे जगत पालिनी माँ दुर्गा तेरा वंदन बारम्बार है।।
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© एस के कपूर “श्री हंस”
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