डॉ राकेश ‘चक्र’
(हिंदी साहित्य के सशक्त हस्ताक्षर डॉ. राकेश ‘चक्र’ जी की अब तक लगभग तेरह दर्जन से अधिक मौलिक पुस्तकें ( बाल साहित्य व प्रौढ़ साहित्य ) तथा लगभग चार दर्जन साझा – संग्रह प्रकाशित तथा कई पुस्तकें प्रकाशनाधीन।लगभग चार दर्जन साझा – संग्रह प्रकाशित तथा कई पुस्तकें प्रकाशनाधीन। कई कृतियां पंजाबी, उड़िया, तेलुगु, अंग्रेजी आदि भाषाओँ में अनूदित । कई सम्मान/पुरस्कारों से सम्मानित/अलंकृत। भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय द्वारा बाल साहित्य के लिए दिए जाने वाले सर्वोच्च सम्मान ‘बाल साहित्य श्री सम्मान’ और उत्तर प्रदेश सरकार के हिंदी संस्थान द्वारा बाल साहित्य की दीर्घकालीन सेवाओं के लिए दिए जाने वाले सर्वोच्च सम्मान ‘बाल साहित्य भारती’ सम्मान, अमृत लाल नागर सम्मान, बाबू श्याम सुंदर दास सम्मान तथा उत्तर प्रदेश राज्य कर्मचारी संस्थान के सर्वोच्च सम्मान सुमित्रानंदन पंत, उत्तर प्रदेश रत्न सम्मान सहित बारह दर्जन से अधिक राजकीय प्रतिष्ठित साहित्यिक एवं गैर साहित्यिक संस्थाओं से सम्मानित एवं पुरुस्कृत।
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आप “साप्ताहिक स्तम्भ – समय चक्र” के माध्यम से उनका साहित्य प्रत्येक गुरुवार को आत्मसात कर सकेंगे।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – समय चक्र – # २९१ ☆
☆ बाल कविता – यज्ञ-हवन से शुद्धि होती… ☆ डॉ राकेश ‘चक्र’ ☆
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यज्ञ-हवन से शुद्धि होती,
आओ मिलकर यज्ञ करें।
दूषित वायु शुद्ध हो जाती,
अंतस में नव प्राण भरें।
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चारों वेद यही हैं कहते,
ईश्वर की यह वाणी है।
ऋषियों ने लिपिबद्ध कर दिए,
ईश्वर के हम प्राणी हैं।
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स्वाध्याय करें सदग्रंथों का,
निज संस्कृति का मान करें।
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पाठ्य पुस्तकें पढ़कर के,
शिक्षित हम हो जाते हैं।
पर सदग्रंथ पढ़े जो भी ,
जीवन सफल बनाते हैं।
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नई उमंगें मन में आएं,
नव नूतन हम ज्ञान भरें।
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दयानंद ऋषि ने हमको,
वेदों का ज्ञान कराया है।
यज्ञ,हवन के मंत्र बताए,
भारत का मान बढ़ाया है।
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ईश्वर ने ही सृष्टि बनाई,
ईश्वर का गुणगान करें।
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© डॉ राकेश चक्र
(एमडी,एक्यूप्रेशर एवं योग विशेषज्ञ)
90 बी, शिवपुरी, मुरादाबाद 244001 उ.प्र. मो. 9456201857
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈



