श्रीमती छाया सक्सेना ‘प्रभु’
(ई-अभिव्यक्ति में संस्कारधानी की सुप्रसिद्ध साहित्यकार श्रीमती छाया सक्सेना ‘प्रभु’ जी द्वारा “व्यंग्य से सीखें और सिखाएं” शीर्षक से साप्ताहिक स्तम्भ प्रारम्भ करने के लिए हार्दिक आभार। आप अविचल प्रभा मासिक ई पत्रिका की प्रधान सम्पादक हैं। कई साहित्यिक संस्थाओं के महत्वपूर्ण पदों पर सुशोभित हैं तथा कई पुरस्कारों/अलंकरणों से पुरस्कृत/अलंकृत हैं। आपके साप्ताहिक स्तम्भ – व्यंग्य से सीखें और सिखाएं में आज प्रस्तुत है एक विचारणीय रचना “कार्तिक मास में तुलसी पूजन…”। इस सार्थक रचना के लिए श्रीमती छाया सक्सेना जी की लेखनी को सादर नमन। आप प्रत्येक गुरुवार को श्रीमती छाया सक्सेना जी की रचना को आत्मसात कर सकेंगे।)
☆ साप्ताहिक स्तम्भ – आलेख # २६१ – कार्तिक मास में तुलसी पूजन… ☆
(आध्यात्मिक, पर्यावरणीय एवं सांस्कृतिक चेतना)
कार्तिक मास और तुलसी पूजन का धार्मिक महत्व है। यह मास भगवान विष्णु के जागरण देव उठनी एकादशी को समर्पित है। भक्त पूरे महीने पवित्र नदी में प्रातः स्नान करके कृष्ण जी व तुलसी की पूजा, दीपदान करते हैं। इस महीने में तुलसी माता का विशेष पूजन करने से विष्णु भगवान की कृपा प्राप्त होती है।
तुलसी विवाह (देवउठनी एकादशी) पर तुलसी का पूजन और भगवान शालिग्राम से विवाह कराया जाता है। यह धर्म, परिवारिक समृद्धि और जीवन में मंगल का प्रतीक माना जाता है। तुलसी माता को लक्ष्मी का अवतार कहा गया है, इसलिए इस मास में उनका पूजन सुख, सौभाग्यवर्द्धक होता है ।
छप्पन भोग छत्तीसों व्यंजन बिन तुलसी प्रभु एक न मानी…
तुलसी दल के बिना भगवान विष्णु भोजन स्वीकार नहीं करते हैं। इसकी टहनियों से माला, इसकी पत्तियों को जल में डालकर उपयोग किया जाता है। तुलसी का पौधा सात्त्विकता का प्रतीक है। इसके समीप ध्यान करने से मन में एकाग्रता और शांति का अनुभव होता है।
तुलसी पौधा वातावरण में ऑक्सीजन की मात्रा बढ़ाता है, साथ ही कार्बन डाइऑक्साइड, सल्फर डाइऑक्साइड को अवशोषित करता है। इसकी खास सुगंध घर और आस-पास के वातावरण कीटाणु रहित करती है। तुलसी लगाने और पूजन की परंपरा हमारे प्रकृति संरक्षण के वैदिक ज्ञान को दर्शाती है। यह केवल आस्था नहीं, पर्यावरणीय संतुलन का केंद्र भी है। तुलसी विवाह में गन्ने का मंडप, हल्दी की पूजा, जैसे अनुष्ठान धार्मिक सामंजस्य और जीवन के नैतिक मूल्यों का संदेश देते हैं।
अतः ये कहा जा सकता है कि कार्तिक मास में तुलसी पौधे की विशेष पूजा आध्यत्मिकता के साथ – साथ पर्यावरणीय व सांस्कृतिक चेतना को भी समृद्ध करती है ।
**
© श्रीमती छाया सक्सेना ‘प्रभु’
माँ नर्मदे नगर, म.न. -12, फेज- 1, बिलहरी, जबलपुर ( म. प्र.) 482020
मो. 7024285788, chhayasaxena2508@gmail.com
≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈




