श्री राकेश कुमार

(श्री राकेश कुमार जी भारतीय स्टेट बैंक से 37 वर्ष सेवा के उपरांत वरिष्ठ अधिकारी के पद पर मुंबई से 2016 में सेवानिवृत। बैंक की सेवा में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान के विभिन्न शहरों और वहाँ  की संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिला। उनके आत्मकथ्य स्वरुप – “संभवतः मेरी रचनाएँ मेरी स्मृतियों और अनुभवों का लेखा जोखा है।” ज प्रस्तुत है आलेख की शृंखला – “देश -परदेश ” की अगली कड़ी।)

☆ आलेख # १५१ ☆ देश-परदेश – Don’t put all your Eggs in one basket ☆ श्री राकेश कुमार ☆

अंग्रेज़ी भाषा के इस फ्रेस को मिडिल स्कूल में पढ़ाया गया था, तो गुरुजी ने इस का तात्पर्य पूछा था ? हम शाकाहारी हैं, हमने भी कह दिया था, हमारे घर में अंडे नहीं आते हैं, इस लिए हमको इस के बारे में कुछ भी पता नहीं हैं।पूरी कक्षा खिलखिला कर खूब हंसने लगी थी।

घर आकर पिताश्री से हमने पूरी बात बताई, तब उन्होंने हमें याद दिलाया कि जब भी रेल यात्रा में जाते है, तो नगद राशि को पेंट की दोनों जेब और शर्ट के नीचे पहनने वाली बंडे की चोर पॉकेट में अलग अलग रख कर यात्रा पर जाते हैं।ये ही नियम अंडों पर भी लागू होता हैं।

विगत दिन जबलपुर स्टेशन पर एक यात्री ने प्लेटफार्म के एक वेंडर से समोसा खरीदा, मोबाइल से भुगतान पूरा ना होने पर विक्रेता ने यात्री की हाथ घड़ी निकाल ली थी।किसी सज्जन ने पूरी वारदात का वीडियो सोशल मीडिया पर प्रसारित कर दिया हैं।

मीडिया को एक काम मिल गया, विक्रेता का लाइसेंस निरस्त हो गया हैं।रेलवे पुलिस उस यात्री को खोज रही हैं, ताकि आगे की कार्यवाही की जा सकें।ये भी हो सकता है, यात्री बिना टिकट यात्रा कर रहा होगा, फिर वो क्यों सामने आएगा ? विक्रेता ने पुलिस को बताया की घड़ी को उसने ट्रेन में ही फेंक दिया था।ये सलाह उसके वकील ने दी होगी, ताकि वो निर्दोष साबित हो जाए।

यदि यात्री का मोबाइल भुगतान करने में फेल हो गया था, तो उसको कुछ धन राशि नगद भी अलग अलग जेबों में रखनी चाहिए थी, और उसकी तस्वीर भी वायरल नहीं होती।

जबलपुर शहर इस घटना से अलग बदनाम हो गया हैं।लोग नेहरू को याद कर रहें है, जिन्होंने जबलपुर को गुंडों का शहर तक कह दिया था, वो तो बाद में स्वर्गीय विनोबा भावे, भूदान आंदोलन के जनक ने जबलपुर को संस्कारधानी बताया था।

इस घटना से दो बातें सामने आई एक तो मोबाइल या बैंक कार्ड के रहते हुए भी कुछ राशि नगद में अवश्य रखें। दूसरी बात “ऊपर वाला सब देख रह है” एक दम सही है।सी सी टीवी कैमरे, मोबाइल आपकी हर हरकत पकड़ ही लेते हैं।

© श्री राकेश कुमार

संपर्क – B 508 शिवज्ञान एनक्लेव, निर्माण नगर AB ब्लॉक, जयपुर-302 019 (राजस्थान)

मोबाईल 9920832096

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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