डॉ.राजेश ठाकुर

( प्रो डॉ राजेश ठाकुर जी का  मंतव्य उनके ही शब्दों में –पाखण्ड, अंध विश्वास, कुरीति, विद्रूपता, विसंगति, विडंबना, अराजकता, भ्रष्टाचार के खिलाफ़ जन-समुदाय को जागृत करना ही मेरी लेखनी का मूल प्रयोजन है…l” अब आप प्रत्येक शनिवार डॉ राजेश ठाकुर जी की रचनाएँ आत्मसात कर सकते हैं. आज प्रस्तुत है आपकी एक भावप्रवण रचना “प्रबोधन“.)  

? साप्ताहिक स्तम्भ ☆ नेता चरित मानस # २७ ?

? कविता – प्रबोधन… ☆ प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर  ? ?

?

—-1—

कोई तो जन-नायक आए, जिसका यह उद्बोधन हो

शास्त्रों में भी संविधान-सा, अब समुचित संशोधन हो

—-2—-

अपने बँगले में जो कुत्ते-बिल्ली पाले बैठे हैं

वो हमसे कहते हैं ‘बिरझू’ तेरे घर में गोधन हो

—-3—–

अर्जुन-भीम-युधिष्ठिर पर भी, वैसा ही अभियोग लगे

चीर-हरण प्रकरण में दोषी, केवल क्यों दुर्योधन हो

—-4—–

बने तथागत मेरा अपना कोई यदि तुम सोच रहे

ख़ुद का तो अवलोकन कर लो, तुम कितने शुद्धोधन हो

        —5—

अग्नि परीक्षा दंश दहेज़ी, शोषण हर युग में सहती

तोड़ो अंध-मूक परिपाटी, नारी हित अनुशोधन हो

—6—–

अनपढ़-अपराधी न पहुँचें, संसद के गलियारों में

चयन के मानक मापदण्ड का, बहुमत से अनुमोदन हो

—-7—-

वादे उनके सच बनकर यदि, उतरें नहीं धरातल पर

फिर मुखिया का लाल किले से, क्यों झूठा सम्बोधन हो

—8—-

बेक़ारी महँगाई ग़रीबी, जात-पाँत के मुद्दों को

सुलझाने यह चले कारवाँ, ना कोई अवरोधन हो

—9—

चलो उड़ा दें ज्ञान के बल पे, पाखण्डों के परखच्चे

जन-जन में ‘राजेश’ मनन हो, चिंतन-तर्क प्रबोधन हो

© प्रो. डॉ. राजेश ठाकुर

शासकीय कॉलेज़ केवलारी

संपर्क — ग्राम -धतूरा, पोस्ट – जामगाँव, तहसील -नैनपुर, जिला -मण्डला (म.प्र.) मोबा. 9424316071

≈ संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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Laxman Hardaha
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शानदार ✊