प्रो. (डॉ.) शरद नारायण खरे
☆ मुक्तक – अमराई की छाँव ☆ प्रो. (डॉ.) शरद नारायण खरे ☆
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अमराई की छाँव सुहाती, मृदु अहसास कराती।
शीतलता देकर के हमको, भावों में ले जाती।
तपन भले ही पीड़ादायक, पर अमराई भाये,
मोहक छाँव मनुज के तन को, राहत से सहलाती।।
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अमराई की छाँव स्वर्ग-सी, सपनों में ले जाती।
मधुर हवा तो गीत सुनाकर, सबको है दुलराती।
मौसम को खुशहाल बनाती, मस्ती को है देती,
बहुत सुहानी होती छैयाँ, मंगल भाव सजाती।।
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अमराई की छाँव खोजकर, सीखो समय बिताना ।
खुशियों से दामन को भरकर, उत्फुल्लित हो जाना।
अमराई की बात निराली, आकर्षण यौवन पर,
हरियाली से नेह लगाकर, उसके ही हो जाना।।
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© प्रो. (डॉ.) शरद नारायण खरे
प्राचार्य, शासकीय महिला स्नातक महाविद्यालय, मंडला, मप्र -481661
(मो.9425484382)
ईमेल – khare.sharadnarayan@gmail.com
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