स्व प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

(आज प्रस्तुत है गुरुवर स्व  प्रोफ. श्री चित्र भूषण श्रीवास्तव जी  द्वारा रचित – “कविता  – लाल बहादुर शास्त्री। हमारे प्रबुद्ध पाठकगण स्व प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’ जी  काव्य रचनाओं को प्रत्येक शनिवार आत्मसात कर सकेंगे.।) 

☆ काव्य धारा # २७३ 

☆ लाल बहादुर शास्त्री…  स्व प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

सौम्य शांत सद्भावमय सात्विकवादी मूर्ति

लाल बहादुर ने किया था नेहरु की पूर्ति।।

*

नेहरु के अवसान पर ये सब लोग उदास

पर शास्त्रीजी ने रचा एक नया इतिहास ।।

*

सूझ-बूझ के थे धनी कर्मठ पर निष्काम

श्रम ही उनका शौक था श्रम ही था विश्राम।।

*

सीमा पै उत्पात था घर में अन्न अभाव

दोनों पर उनका पड़ा लेकिन सही प्रभाव।।

*

सेनाओं को शक्ति दी औ’ किसान को धैर्य

खूब निभाई दोस्ती औ’ दुश्मन से बैर।।

*

“जय जवान जय किसान” का नारा दे अभिराम

ध्वस्त कराये पाक के पैटन टेंक तमाम ।।

*

सारी सेना खुश हुई, प्रमुदित हुये किसान

जन हित में दोनों रहे सही सकल अभियान।।

*

कद के छोटे थे मगर शासन में होशियार

भारत को गौरव दिया जग में विविध प्रकार।।

*

उस निस्पृह व्यक्तित्व को बारम्बार प्रणाम

अमर रहेगा जगत में शास्त्रीजी का नाम ।।

© प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

साभार – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’

ए २३३ , ओल्ड मीनाल रेजीडेंसी  भोपाल ४६२०२३

मो. 9425484452

vivek1959@yahoo.co.in

≈  संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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