श्री राकेश कुमार
(श्री राकेश कुमार जी भारतीय स्टेट बैंक से 37 वर्ष सेवा के उपरांत वरिष्ठ अधिकारी के पद पर मुंबई से 2016 में सेवानिवृत। बैंक की सेवा में मध्यप्रदेश, महाराष्ट्र, छत्तीसगढ़, राजस्थान के विभिन्न शहरों और वहाँ की संस्कृति को करीब से देखने का अवसर मिला। उनके आत्मकथ्य स्वरुप – “संभवतः मेरी रचनाएँ मेरी स्मृतियों और अनुभवों का लेखा जोखा है।” आज प्रस्तुत है आलेख की शृंखला – “देश -परदेश ” की अगली कड़ी।)
☆ आलेख # १७४ ☆ देश-परदेश – एल पी जी गैस: नई मुसीबत – भाग – २ ☆ श्री राकेश कुमार ☆
मित्र के गैस संबंधित कार्य के लिए सब बाधाएं पार कर डीलर के हॉल में प्रवेश कर राहत की सांस ली। संबंधित व्यक्ति तक पहुंचने की लिए ज़िग जैग व्यवस्था थी। इसको “क्राउड मैनेजमेंट” भी कहा जाता है।
समय बहुत लग जाएगा, ये विचार आते ही दिमाग के घोड़े चलाए। कहीं पढ़ा था, पानी अपना रास्ता स्वयं बनाता है। उसी तर्ज पर हम भी चल पड़े, अधिकतर लोग मोबाइल में वीडियो देख रहे थे, उनकी नजरों के सामने से उनसे आगे निकल गए।
अधिकतर लोग तो झगड़ा कर रहे थे, पेट खाली हो तो गुस्सा भी बहुत आता है। यहां तो घर के चूल्हे ही नहीं जल पा रहें हैं। हम जैसे ही बुकिंग कर्मचारी के सामने पहुंचे और अपना काम बताया, वो बोला आप गलत जगह में आए हैं। आपको तो एजेंसी के कंप्यूटर विभाग में जाना पड़ेगा। हम तो भेड़ चाल के कारण भीड़ के साथ चले आए थे।
कंप्यूटर विभाग वाले सज्जन फुर्सत में थे। उन्होंने मित्र के आधार कार्ड को सिस्टम से हटा दिया। मित्र को इस बावत सूचित कर राहत की सांस ली। हमें डर लग रहा था, कहीं मित्र परिवार सहित हमारे यहां ना आ जाए, कुकिंग गैस की किल्लत का समय जो चल रहा हैं।
© श्री राकेश कुमार
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