श्री राजेश कुमार सिंह ‘श्रेयस’

☆ साप्ताहिक स्तम्भ – श्रेयस साहित्य # ४९ ☆

☆ कविता ☆ ~ राम : मानवीय आदर्श के मानदंड ~ ☆ श्री राजेश कुमार सिंह ‘श्रेयस’ ☆ 

सीता  का  संताप  बड़ा  था,  बीता  जीवन  संघर्षो  में ।

राघव  का  दुःख  भी कम न था,  आया सुख के वर्षो में।।

*

पर अग्नि में तप कर कैसे से, सोना निज चमक दिखाता है।

सीता  का  तप  तपकर मानो, राघव को विजय दिलाता है।।

*

सीता  शब्द  राम  दोनों  मिल,  महामन्त्र  बन   जाते  है।

ध्वजा शिखर की आज  कह  रही,  राम अवध में  आतें  हैं।।

*

सीताराम  शब्द  दोनों  मिल  मानवता  का  मान  बढ़ते हैं।

जीवन   जीने   के   कौशल   को  कौशलेंद्र  बतलाते  हैं।।

*

कैसे   रिश्ते   जिए   जाते   किससे   कैसा   नाता  हो।

वह  भी  जीवन  जी  सकता है, जिसको कुछ न आता हो ।।

*

आदर्शो  को   मानदंड   पर   कैसे    नापा   जाता   है।

राम  तुला  हैं  मानवता  के,  रिश्तों  को तौला  जाता  है।।

♥♥♥♥

© श्री राजेश कुमार सिंह “श्रेयस”

लखनऊ, उप्र, (भारत )

दिनांक 22-02-2025

संस्थापक संपादक – श्री हेमन्त बावनकर/सम्पादक (हिन्दी) – श्री विवेक रंजन श्रीवास्तव ‘विनम्र’ ≈

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