डॉ. रामेश्वरम तिवारी
संक्षिप्त परिचय
- हिंदी-प्राध्यापक(सेवानिवृत्त) महारानी लक्ष्मीबाई शासकीय कन्या स्नातकोत्तर महाविद्यालय, भोपाल (म.प्र).
- नई दुनिया, दैनिक भास्कर, वीणा, हंस, धर्मयुग, कादम्बिनी आदि पत्र-पत्रिकाओं में कविता और लघुकथाएँ प्रकाशित। पुस्तकः कविता के ज़रिए, मध्य प्रदेश साहित्य अकादमी के सौजन्य से प्रकाशित।
आज प्रस्तुत है आपका एक भावप्रवण कविता – गाल बजाने से…!
☆ ॥ कविता॥ गाल बजाने से…! ☆ डॉ. रामेश्वरम तिवारी ☆
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गाल बजाने से हाल नहीं बदलते हैं,
खोटे सिक्के ज्यादा दिन नहीं चलते हैं।
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कोई कितना भी होशियार, सयाना हो,
समय आने पर ही सितारे बदलते हैं।
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रोज-रोज बार-बार द्वारे दस्तक देने पर,
एक दिन ह्रदय के बंद कपाट खुलते हैं।
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जवान बेटों की आवारगी को देखकर,
प्राणों से प्यारे लाड़ले अपने खलते हैं।
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अपनों को आगे बढ़ता हुआ देखकर,
ख़ैर, गैर तो गैर अपने जन भी जलते हैं।
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© डॉ. रामेश्वरम तिवारी
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