श्रीमद् भगवत गीता

हिंदी पद्यानुवाद – प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

दशम अध्याय

(भगवान द्वारा अपनी विभूतियों और योगशक्ति का कथन)

 

पवनः पवतामस्मि रामः शस्त्रभृतामहम्‌।

झषाणां मकरश्चास्मि स्रोतसामस्मि जाह्नवी ।।31।।

 

पावन कर्ता पवन हूँ धनुर्वीर श्रीराम

नदियों में गंगा नदी,मत्स्य मगर उद्दाम।।31।।

 

भावार्थ :  मैं पवित्र करने वालों में वायु और शस्त्रधारियों में श्रीराम हूँ तथा मछलियों में मगर हूँ और नदियों में श्री भागीरथी गंगाजी हूँ।।31।।

 

Among the purifiers (or the speeders) I am the wind; Rama among the warriors am I; among the fishes I am the shark; among the streams I am the Ganga.।।31।।

 

प्रो चित्र भूषण श्रीवास्तव ‘विदग्ध’

ए १ ,विद्युत मण्डल कालोनी, रामपुर, जबलपुर

vivek1959@yahoo.co.in

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